जागरण संवाददाता, कनीना। क्षेत्र में पशुपालकों को मिलने वाले पशु किसान क्रेडिट कार्ड हेल्थ सर्टिफिकेट से जुड़ा एक फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस मामले में थाना शहर कनीना में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
आरोप है कि राजकीय पशु चिकित्सालय मोतला कलां के नाम से फर्जी हेल्थ सर्टिफिकेट तैयार कर बैंक कार्यों में इस्तेमाल किया गया। राजकीय पशु चिकित्सालय मोतला कलां, रेवाड़ी में कार्यरत पशु चिकित्सक डाॅ. अरविंद कुमार ने इस संबंध में उप पुलिस अधीक्षक कनीना को शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
डाॅ. अरविंद कुमार ने बताया कि उनके संज्ञान में आया है कि जीवीएच मोतला कलां के नाम से एक फर्जी पीकेसीसी हेल्थ सर्टिफिकेट जारी किया गया, जो पुनीत कुमार निवासी गांव मुसेपुर, जिला रेवाड़ी के नाम पर तैयार किया गया है।
इस सर्टिफिकेट का उपयोग एसबीआई कनीना से जुड़े बैंक कार्यों में किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हेल्थ सर्टिफिकेट न तो उनके द्वारा और न ही राजकीय पशु चिकित्सालय मोतला कलां द्वारा कभी जारी किया गया है।
आरोप है कि यह फर्जी सर्टिफिकेट बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से तैयार किया गया है। कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट की प्रति शिकायत के साथ पुलिस को सौंपी। शिकायत मिलने के बाद उप पुलिस अधीक्षक कनीना कार्यालय से यह मामला थाना शहर कनीना को भेजा गया, जहां एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
क्या है पीकेसीसी हेल्थ सर्टिफिकेट
पीकेसीसी हेल्थ सर्टिफिकेट पशुपालकों को उनकी अर्जी पर या बैंक की मांग पर जारी किया जाता है। इसके आधार पर पशुपालक पशु फार्म खोलने या पशु खरीदने के लिए एक करोड़ रुपये तक का बैंक ऋण ले सकता है।
ऐसे में फर्जी सर्टिफिकेट का मामला बैंकिंग प्रणाली और सरकारी विभागों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि फर्जी सर्टिफिकेट किसने तैयार किया, इसमें और कौन-कौन शामिल है तथा बैंक स्तर पर किस तरह की भूमिका रही।
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