सांकेतिक तस्वीर।
जासं, आगरा। सेवानिवृत्त शिक्षक को मनी लाड्रिंग केस का डर दिखाकर साइबर ठग ने डिजिटल अरेस्ट करके 20 लाख रुपये की ठगी की। शिक्षक को आरोपित को खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बनाया। उन्हें वीडियो काल पर रखा गया। दो बार में 20 लाख रुपये खातों में ट्रांसफर कराए गए।
पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सैंया के कुकावर बिरहरू निवासी 72 वर्षीय हरीचंद्र सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। साइबर ठग ने 26 से 30 दिसंबर तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट करके 20 लाख रुपये ठग लिए।
साइबर ठग ने 15 लाख रुपये 26 दिसंबर को और पांच लाख रुपये 30 दिसंबर को अपने बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कराए। पीड़ित की ओर से साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
इसमें कहा है कि साइबर ठग ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड नंबर से जुड़े खाते से 6.80 करोड़ रुपये का फर्जी लेनदेन हुआ है। उन पर मनी लाॅड्रिंग का केस दर्ज होगा। साइबर ठग ने जेल जाने डर दिखाया।
उन्हें वाट्सएप पर कई बार वीडियो काॅल किए गए। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं। इस वारदात के बाद से परिवार मानसिक व आर्थिक रूप से टूट गया है। पीड़ित ने शिकायत की प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इंस्पेक्टर साइबर थाना रीता यादव ने बताया कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। साइबर ठगों के बारे जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच एजेंसी नहीं करती है वीडियो काॅल
साइबर थाना प्रभारी रीता यादव ने कहा कि जागरूकता के बाद भी लोग साइबर ठगों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं है। न ही कोई जांच एजेंसी जैसे सीबीआइ, कस्टम, ईडी, आयकर विभाग व पुलिस किसी भी व्यक्ति को वीडियो काॅल करती है।
अगर कोई वीडियो कॉल करके खुद को अधिकारी बताकर कार्रवाई का डर दिखाए तो समझो वह साइबर ठग है। उन्होंने लोगों से सावधान रहने, अनजान व्यक्ति को बैंक खातों की जानकारी, ओटीपी न देने की बात कही। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काॅल करें। |
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