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प्रतीकात्मक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। बाल मजदूरी के लिए झारखंड से ट्रेन के जरिये आनंद विहार रेलवे स्टेशन लाए गए सात बच्चों को मिशन मुक्ति फाउंडेशन ने रेलवे पुलिस के साथ मिलकर आजाद कराया है। सभी की उम्र 17 से कम है। छुड़ाये गए बच्चों में छह लड़के व एक लड़की है। मेडिकल करवाने पर पता चला कि बरामद नाबालिग गर्भवती है। गांव में उसके प्रेमी ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। नाबालिग को पता ही नहीं था कि वह गर्भवती है।
आधार कार्ड में बढ़ा दी गई उम्र
बरामद किए गए बच्चों को आश्रम भेज दिया गया है। आनंद विहार रेलवे पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया है। संस्था ने आरोप लगाया कि करीब 30 बच्चे बरामद होते। लेकिन रेलवे पुलिस ने उनके आधार कार्ड में उम्र देखकर छोड़ दिया। आरोप लगाया कि बाल मजदूरी करवाने वालों ने लालच देकर उनकी उम्र आधार कार्ड में बढ़ाई हुई थी।
...तब रेलवे पुलिस को दी सूचना
फाउंडेशन के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि 13 जनवरी को उन्हें सूचना मिली थी ट्रेन नंबर 12825 रांची से आनंद विहार सुपरफास्ट एक्सप्रेस से झारखंड से नाबालिगों को दिल्ली में बाल मजदूरी के लिए लाया जा रहा है। वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर आनंद विहार स्टेशन पहुंचे। रेलवे पुलिस को मामले की सूचना दी।
आयोग ने पुलिस से जवाब मांगा
अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार कहती है कि उम्र की प्रमाणिकता के लिए आधार कार्ड सत्यापित नहीं है। बच्चों की संख्या करीब 30 थी। लेकिन पुलिस ने उनकी नहीं सुनी और आधार कार्ड में उम्र देखकर अधिकतर बच्चोंं को छोड़ दिया। एक नाबालिग गर्भवती निकली। उसके परिवार को सूचना दे दी गई है। संस्था ने इस मामले में राष्ट्रीय मानवा अधिकार आयोग को इस संबंध में शिकायत की है। आयोग ने पुलिस से जवाब मांगा है। पुलिस ने संस्था के आरोप को बेबुनियाद बताते कहा कि बच्चे मुक्त करवाए गए हैं।
झारखंड भवन के अधिकारी ने संस्था को दी थी जानकारी
दिल्ली में झारखंड भवन बना हुआ है। संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि झारखंड भवन में तैनात एक अधिकारी ट्रेन से दिल्ली आ रहे थे। उनकी नजर कई नाबालिगों पर पड़ी। उन्हें मामला संदिग्ध लगा तो मामले की सूचना संस्था को दी। उनकी शिकायत पर संस्था से जुड़े पदाधिकारी छापेमारी के लिए आनंद विहार स्टेशन पर पहुंचे।
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