दीपक मिश्रा, बाराबंकी। जिले की मिट्टी, परंपराएं और ग्रामीण जीवनशैली अब पर्यटन के माध्यम से पहचान बनाएंगी। छह गांवों को ग्रामीण पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए चिह्नित किया है। चयनित गांवों में रौनी, मंजीठा, कोटवाधाम, बरौलिया, लोधौरा और भगहर झील शामिल हैं। इन गांवों में स्थानीय संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, लोक कला और ग्रामीण परिवेश को पर्यटन से जोड़ने की योजना है।
गंगा-यमुना की पावन धारा से लेकर अयोध्या, काशी और मथुरा की आस्था भूमि तक, ताजमहल जैसी विश्वविख्यात धरोहर से लेकर बुंदेलखंड और तराई के अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य तक उत्तर प्रदेश हर यात्री को एक अनोखा अनुभव दे रहा है। यह क्रम बाराबंकी तक पहुंच गया है। राज्य सरकार पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा, सुगम संपर्क व्यवस्था और पर्यटक अनुकूल सुविधाओं का विस्तार कर रही है, जिसमें जिले के छह गांव चयनित हुए हैं।
इन गांवों को मिलेगा ग्रामीण पर्यटन का दर्जा
रामगनर को लोधौरा : यहां लोधेश्वर महादेवा तीर्थ है। प्रत्येक सोमवार के अलावा सावन, महाशिवरात्रि व कजरी तीज पर लाखों कांवड़िए यहां आते हैं। इस मंदिर का शिवलिंग पृथ्वी पर उपलब्ध 52 अनोखे एवं दुर्लभ शिवलिंगों में से एक है।
कुंतेश्वर महादेव : जिला मुख्यालय से 42 कुंतेश्वर महादेव का मंदिर सिरौलीगौसपुर के किंतूर गांव में स्थित है। मान्यता है कि कुंतेश्वर का शिवलिंग आज भी सुबह पूजित मिलता है।
बरौलिया गांव : यहां देव वृक्ष पारिजात स्थित है। मान्यता है कि माता कुंती ने कुंतेश्वर महादेव की पूजा के लिए इंद्रलोक से देववृक्ष के पुष्प मंगाए थे, पर अर्जुन पूरा वृक्ष ले आए थे।
कोटवाधाम : सिरौलीगौसपुर के कोटवाधाम तीर्थ में सतनामी संप्रदाय के प्रवर्तक रहे समर्थ स्वामी जगजीवन साहेब की समाधि है। सभी धर्मों के लोग इनके अनुयायी हैं। बिहार, झारखंड व नेपाल से भी श्रद्धालु आते हैं। अब इसे ग्रामीण पर्यटन का दर्ज मिलने जा रहा है।
मंजीठा व रौनी : सतरिख के मंजीठा में नागदेवता का भव्य मंदिर है। लोग नागदेवता को दूध और अक्षत चढ़ाने के लिए आते हैं। वहीं, हैदरगढ़ के रौनी का औसानेश्वर महादेव के पावन स्थल को पर्यटन का दर्ज मिलेगा।
भगहर झील : सूरतगंज के सौ हेक्टेयर से अधिक में फैला भगहर झील को ग्रामीण पर्यटन का दर्ज मिलेगा। यहां बाहर से आने हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं।
प्रथम चरण में जिले के छह गांवों को पर्यटन स्थल का दर्ज दिलाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाकर शासन को भेज दी गई है। कोई भी व्यक्ति किसी भी गांव को पर्यटन का दर्जा दिलाने के लिए आवेदन भी कर सकता है। - अन्ना सुधन, सीडीओ। |