अब सरसों की फसल नहीं होगी खराब
जागरण संवाददाता, नारदीगंज (नवादा)। प्रखंड मुख्यालय स्थित उजला भवन में शुक्रवार को किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कृषि प्रखंड कार्यालय के सौजन्य से संपन्न हुआ, जिसमें रबी मौसम 2025–26 में होने वाली फसलों को लेकर किसानों को तकनीकी जानकारी दी गई। गोष्ठी में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और खेती से जुड़ी समस्याओं व समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।
सरसों के साथ धनिया लगाने की सलाह
गोष्ठी में विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि सरसों की फसल के साथ धनिया की सहफसली खेती करने से लाही रोग का खतरा नहीं रहता है।
अधिकारियों ने कहा कि फसल विविधीकरण अपनाकर किसान उत्पादन के साथ-साथ रोगों से भी बचाव कर सकते हैं। यह तरीका कम लागत में अधिक लाभ देने वाला है।
जैविक खेती से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
किसानों को रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद के उपयोग पर जोर दिया गया। बताया गया कि गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक खाद खेतों में डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसलों की उत्पादन क्षमता में सुधार होता है। साथ ही इससे लागत भी कम होती है और पर्यावरण सुरक्षित रहता है।
कम पानी वाली फसलों को अपनाने की जरूरत
गोष्ठी में जल संकट को गंभीर समस्या बताते हुए कम पानी में होने वाली फसलों के चयन पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि पानी की कमी भविष्य में खेती के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में किसानों को आलू, गेहूं सहित अन्य फसलों की खेती जीरो टिलेज तकनीक से करने की सलाह दी गई।
कटाई में आधुनिक उपकरणों के प्रयोग पर जोर
कृषि अधिकारियों ने बताया कि अभी अधिकांश किसान हाथ से फसलों की कटाई करते हैं, जिससे समय और श्रम दोनों अधिक लगता है। आधुनिक हार्वेस्टर और रिपर मशीन के उपयोग से कम समय में फसल की कटाई संभव है, जिससे लागत घटेगी और किसान समय पर दूसरी फसल की बुआई कर सकेंगे।
सरकारी योजनाओं से मिलेगा सीधा लाभ
गोष्ठी में किसानों को बताया गया कि सरकार दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है।
यदि किसान समय पर पंजीकरण कराते हैं तो उन्हें बीज, खाद और तकनीकी सहायता का लाभ मिलेगा। बीडीओ विवेक कुमार गौरव ने कहा कि योजनाओं का लाभ लेकर किसान आर्थिक रूप से खुशहाल बन सकते हैं।
किसानों ने रखीं अपनी समस्याएं
कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने खेती से जुड़ी अपनी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सभी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। गोष्ठी में प्रखंड अध्यक्ष, कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।
क्या कहते हैं कृषि विज्ञानी
राई एवं सरसो के फूल निकलने के समय लाही किट का प्रकोप काफी असरकारक होता है। ऐसे में किसान क्लोरोपिड 17.8 प्रतिशत एसएल नामक दवा का छिड़काव करें। बताया गया कि दवा की मात्रा प्रति 15 लीटर पानी में 05 एमएल डालें, तथा सात से 10 दिनों के अंतराल पर छिड़काव को रिपीट कर दें, लाही एवं अन्य कीटो से राहत मिलेगी।
रविकांत चौबे, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र शेखोदेवरा(नवादा)
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