
नई दिल्ली: भारत और रूस की दोस्ती एक नए लेवल पर जा रही है। यह दोस्ती हथियारों और तेल की आपूर्ति से कहीं आगे होगी। अमेरिका की रूस से तेल खरीद पर सख्त टैरिफ लगाने के बीच भारत और रूस अलग-अलग क्षेत्रों में फोकस कर रहे हैं। रूस की कई कंपनियों ने भारत की कंपनियों के साथ मिलकर बड़े-बड़े जहाजों को बनाने, सूचना प्रौद्योगिकी, अक्षय ऊर्जा, तेल रिफाइन करने और धातु विज्ञान के क्षेत्रों में काम करने की मंशा जाहिर की है। इसके लिए आपस में बातचीत भी चल रही है। यह बातचीत तब हो रही है, जब अमेरिका ने रूसी तेल पर पाबंदी लगा दी है और भारत पर सख्त टैरिफ लगा दिए हैं। भारत-रूस के इस नए फोकस से अमेरिका की टेंशन और बढ़ सकती है। द इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार, खास बात यह है कि रूस जिन सभी गैर ऊर्जा संयुक्त उद्यमों के लिए भारत पर दांव लगा रहा है, उनका उत्पादन भारत में ही किया जाएगा। यानी प्रोडॅक्शन लोकल लेवल पर किया जाएगा। बीते दिसंबर को रूस-भारत के बीच सालाना शिखर सम्मेलन में इस पर जोर भी दिया गया था।politicstoday.org पर छपे एक लेख के अनुसार, भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में अभी भी रूस का हिस्सा लगभग 45% है। दिसंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दौरा इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि डिफेंस पॉलिसी में सिर्फ खरीदने से भारत में मिलकर उत्पादन करने की तरफ बदलाव आया। हालांकि रूस कई एक्सपोर्ट और कोर टेक्नोलॉजी पर वीटो पावर बनाए रखेगा। पुतिन के दौरे से तेल, फर्टिलाइजर, जरूरी मिनरल्स, न्यूक्लियर रिएक्टर और आर्कटिक तक पहुंच के लिए भारत के लॉन्ग-टर्म सप्लायर के तौर पर रूस की भूमिका और मजबूत हुई। ट्रंप की आपत्तियों के बावजूद, रूस ने भारत को तेल और ईंधन की "बिना रुकावट" सप्लाई की गारंटी दी है। फर्टिलाइजर और एनर्जी सबसे ज़रूरी मुद्दे हैं; इनके बिना भारतीय किसानों और इंडस्ट्रीज़ को नुकसान होगा। इसलिए, दिल्ली मॉस्को का साथ नहीं छोड़ेगा।politicstoday.org के मुताबिक, भारत-रूस आर्थिक सहयोग कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 तक सालाना व्यापार मूल्य 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। दोनों देश यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी आगे बढ़ रहे हैं। वे पश्चिमी देशों के कंट्रोल से बाहर व्यापार को आसान बनाने के लिए रुपये और रूबल का इस्तेमाल करके वैकल्पिक करेंसी चैनल भी बना रहे हैं। पेमेंट के लिए नेशनल करेंसी का इस्तेमाल करने से भारत से रूस को ज्यादा एक्सपोर्ट करने में मदद मिलेगी। दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी असंतुलन है। भारत को रूस को अपना एक्सपोर्ट बढ़ाना होगा, नहीं तो, रुपये का ढेर एक समस्या बन जाएगा।दिसंबर में हुए इस सम्मेलन में रूस का आर्थिक एजेंडा बेहद मजबूत था। रूस के व्यापार प्रतिनिधि आंद्रेई सोबोलेव ने हाल ही में रूस की समाचार एजेंसी TASS को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि मॉस्को के विदेश आर्थिक एजेंडे में भारत सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि दोनों देश 〾यापार में विविधता लाने और गैर-संसाधन और गैर-ऊर्जा वस्तुओं की हिस्सेदारी बढ़ाने✩र ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।सोबोलेव ने कहा-यह इंटरेस्ट दोनों पक्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सोबोलेव ने कहा कि दोनों देश व्यापार में विविधता लाने और नॉन-रिसोर्स और नॉन-एनर्जी सामानों का हिस्सा बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। सोबोलेव ने कहा-यह दिलचस्पी दोनों तरफ साफ दिख रही है। रूसी कंपनियां भारत को प्रोडक्शन को लोकलाइज करने के लिए एक अच्छी जगह मानती हैं, जो घरेलू बाजार को टारगेट करने के साथ-साथ दक्षिण एशियाई और तीसरे देशों के बाज़ारों में विस्तार करना चाहती हैं, जबकि भारतीय कंपनियां रूसी बाजार में ज्यादा से ज्यादा मौके तलाश रही हैं।सोबोलेव ने कहा कि नॉर्दर्न सी रूट रूसी-भारतीय सहयोग का एक आशाजनक क्षेत्र है। दोनों सरकारों ने एक स्थायी कार्गो बेस बनाने और ट्रांसपोर्टेशन के लिए आर्थिक मापदंडों के लक्ष्य तय किए हैं और संयुक्त लॉजिस्टिक्स और जहाज निर्माण परियोजनाओं की संभावनाओं का पता लगा रही हैं। सोबोलेव ने TASS को बताया कि यह मध्यम और लंबी अवधि में इस रूट में व्यवसायों की बढ़ती व्यावहारिक रुचि को दर्शाता है।नॉर्दर्न सी रूट आर्कटिक महासागर के रूसी सेक्टर में मुख्य समुद्री रास्ता है। यह रूस के उत्तरी तट के किनारे आर्कटिक महासागर के समुद्रों (बैरेंट्स, कारा, लाप्टेव, पूर्वी साइबेरियाई और बेरिंग सागर) तक फैला हुआ है। यह शिपिंग रूट रूस के यूरोपीय और सुदूर पूर्वी बंदरगाहों और साइबेरिया की नौकायन योग्य नदियों को एक ही ट्रांसपोर्ट सिस्टम में जोड़ता है। इस रूट की लंबाई 5,600 किमी है, जो कारा स्ट्रेट से प्रोविडेंस बे तक फैला हुआ है।फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स (FIEO) के डायरेक्टर जनरल और CEO अजय सहाय ने दिसंबर में भारत में रूसी ट्रेड मिशन द्वारा आयोजित एक मीटिंग में कहा था कि भारत रूस को अपने सामान और सेवाओं के एक्सपोर्ट को दोगुना करके 5 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 10 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा था-ऐसे कई सेक्टर हैं जहां हमने पहले ही मार्केट एक्सेस हासिल कर लिया है और हमें रूसी बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने की जरूरत होगी।सहाय ने कहा था-यह अच्छी बात है कि हम 2030 तक 100 अरब डॉलर के ट्रेड टर्नओवर के अपने लक्ष्य के करीब पहुंच रहे हैं, लेकिन मुझे बहुत खुशी होगी अगर इसमें से कम से कम 30-35 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट भारत से हो और लगभग 60-65 अरब डॉलर का इंपोर्ट रूस से हो। उनके अनुसार, पिछले एक साल में भारत और रूस के बीच व्यापार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स को अच्छे क्षेत्रों में गिनाया। सहाय ने कहा-हमारे पास टूरिज्म, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स, डिजिटल पेमेंट, फिनटेक, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन एनर्जी, शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर में बहुत बड़ी क्षमता है। |