शैलेंद्र गोदियाल, हरिद्वार। गंगा तट पर स्थित बैरागी द्वीप शनिवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार शताब्दी समारोह की तैयारियों से कुंभ जैसा जीवंत हो उठा है। यहां शांतिकुंज के हजारों स्वयंसेवक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आयोजन स्थल को संवारने में जुटे हैं।
कहीं श्रम यज्ञ की गूंज है तो कहीं रचनात्मकता के रंगों का हुनर उभर रहा है। आयोजन स्थल के गेट से लेकर भोजन पंडाल तक सेवा और साधना का भाव है। सुरक्षा, सजावट, निर्माण, स्वागत- सत्कार, पंजीकरण, भोजन, आवास सहित तमाम व्यवस्थाएं स्वयंसेवकों के हाथों आकार ले रही हैं।
शताब्दी समारोह की शुरुआत आज रविवार को ध्वजबंधन से होगी और समापन 24 जनवरी को होगा। पिछले ढाई माह से गंगा तट स्थित बैरागी द्वीप में शांतिकुंज तीन हजार से अधिक कार्यकत्र्ता करीब एक लाख वर्ग फीट क्षेत्र में शताब्दी समारोह स्थल को आकार देने में नल-नील की भांति श्रमयज्ञ में योगदान दिया है।
स्वयंसेवकों ने निस्वार्थभाव से स्वच्छता अभियान से लेकर अलग-अलग ऋषि नगरों में आवास कैंपों का निर्माण, भोजनालय की व्यवस्था, स्नानघर और शौचालयों की स्थापना, अस्थायी सड़कों का निर्माण तथा भोजन तैयार करने से लेकर परिसर की नियमित सफाई तक का हर कार्य स्वयंसेवक स्वयं कर रहे हैं।
ओडिशा के कलाकार दे रहे हैं, रेत को सुंदर आकार शताब्दी समारोह के दौरान बैरागी कैंप में रचनात्मकता के विविध रंग देखने को मिल रहे हैं।
गंगा किनारे बिखरी रेत को ओडिशा के क्योंझर जिले से आए दो फाइनआर्ट कलाकार अपनी कला का हुनर दिखा रहे हैं। इन कलाकारों में निशिकांत और सुजजीत महंत हैं।
सुजजीत महंत ने फाइनआर्ट में पीजी और निशिकांत ने यूजी की डिग्री ली है। ये दोनों कलाकार पिछले आठ वर्षों से रेत से कलाकृतियां बनाने के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पुष्कर मेला, कोणार्क महोत्सव, भगवान जगन्नाथ महोत्सव, भरतपुर महोत्सव सहित देश के कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में वे अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। |