ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर थोपा 10 फीसदी टैरिफ, EU ने दी आर्थिक संकट की चेतावनी दी (फोटो- रॉयटर)
रॉयटर, ब्रसेल्स। यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया धमकी पर गहरी चिंता जताई है। ट्रंप ने कहा है कि अगर अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिली, तो वह यूरोपीय देशों पर टैरिफ बढ़ाते रहेंगे। इस बयान के बाद ईयू ने “खतरनाक आर्थिक संकट“ की चेतावनी जारी की है।
यूरोप अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट रहेगा
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय संघ परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “ट्रंप की टैरिफ नीति से ट्रांसअटलांटिक संबंध कमजोर होंगे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट का खतरा बढ़ जाएगा। यूरोप अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए एकजुट रहेगा और समन्वित कदम उठाएगा।“
ईयू की शीर्ष राजनयिक काजा कल्लास ने \“एक्स\“ कार्यक्रम में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह टैरिफ न केवल यूरोप बल्कि अमेरिका की समृद्धि को भी नुकसान पहुंचाएंगे।
अटलांटिक के दोनों किनारों पर गरीबी बढ़ सकती है
उन्होंने जोर देकर कहा, “इससे अटलांटिक के दोनों किनारों पर गरीबी बढ़ सकती है। अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा का मुद्दा है, तो इसे नाटो के फ्रेमवर्क में सुलझाया जा सकता है। लेकिन टैरिफ लगाना सहयोगियों में फूट डालने जैसा है, जिसका फायदा रूस और चीन जैसे देश उठा सकते हैं।“
कल्लास ने यह भी उल्लेख किया कि यह विवाद यूरोपीय संघ को यूक्रेन में रूस के खिलाफ चल रहे युद्ध से विचलित कर सकता है, जो ईयू की प्राथमिकता है।
ग्रीनलैंड विवाद की शुरुआत ट्रंप के पुराने बयान से हुई, जब उन्होंने 2019 में ग्रीनलैंड को “सामरिक महत्व“ बताते हुए इसे खरीदने की इच्छा जताई थी। अब 2026 में फिर से सत्ता में आने के बाद ट्रंप ने इस मुद्दे को दोहराया है।
हाल ही में, ट्रंप प्रशासन ने ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ थोप दिया है, जिससे व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ गया है। ईयू अधिकारियों का कहना है कि यह कदम वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन है और इससे यूरोपीय अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है।
ईयू और अमेरिका के बीच वार्ता की संभावना
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद नाटो गठबंधन को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में सामरिक महत्व रखता है। डेनमार्क, जिसके अधीन ग्रीनलैंड है, ने ट्रंप की मांग को अस्वीकार कर दिया है और ईयू से समर्थन मांगा है। आने वाले दिनों में ईयू और अमेरिका के बीच वार्ता की संभावना है, लेकिन फिलहाल टैरिफ की धमकी से बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है।
सभी पक्ष बातचीत से मुद्दा सुलझाएं- ईयू
ईयू ने अपील की है कि सभी पक्ष बातचीत से मुद्दा सुलझाएं, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। ट्रंप प्रशासन से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन व्हाइट हाउस सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है। |