30 के बाद दोस्ती कम नहीं होती, बल्कि सबसे ज्यादा \“मजबूत और टिकाऊ\“ बनती है (Image Source: AI-Generated)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको भी लगता है कि 30 की उम्र पार करते ही जिम्मेदारियों के बोझ तले सहेलियां पीछे छूट जाती हैं? क्या शादी, बच्चे और करियर की दौड़ में दोस्ती की वह पुरानी चमक फीकी पड़ जाती है? अगर आप भी ऐसा मानती हैं, तो यह आर्टिकल आपके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान ले आएगा।
हाल ही में आई एक रिसर्च ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। सच तो यह है कि 30 के बाद महिलाओं की दोस्ती कमजोर नहीं, बल्कि पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और सच्ची हो जाती है। यह वह दौर है जब दोस्ती महज हंसी-मजाक तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा सहारा बन जाती है।
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क्या कहती है रिसर्च?
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन द्वारा की गई एक स्टडी में बेहद दिलचस्प बातें सामने आई हैं। इस स्टडी के मुताबिक, जिन महिलाओं के पास एक \“बेस्ट फ्रेंड\“ होती है, उनकी मेंटल हेल्थ और कॉन्फिडेंस उन महिलाओं के मुकाबले काफी बेहतर होता है, जिनके पास ऐसी दोस्ती नहीं होती। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, महिलाएं अपनी करीबी सहेलियों को महज दोस्त नहीं, बल्कि अपना \“चुना हुआ परिवार\“ मानने लगती हैं। यह अपनापन उन्हें जीवन में गहरी संतुष्टि देता है।
बनते हैं मुश्किल वक्त के साथी
30 की उम्र अपने साथ कई बड़ी चुनौतियां लेकर आती है। शादी, बच्चे, करियर के उतार-चढ़ाव और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल- इन सब के बीच एक महिला को सहारे की जरूरत होती है। ऐसे मुश्किल समय में ये दोस्त ही \“इमोशनल एंकर\“ यानी भावनात्मक सहारे का काम करते हैं।
इस बात को 31 साल की ओलिविया के अनुभव से समझा जा सकता है। ओलिविया के लिए साल 2025 बेहद मुश्किल भरा रहा, लेकिन उनकी सहेलियों ने उन्हें टूटने नहीं दिया। ओलिविया कहती हैं, “यही वह समय है जब असली दोस्तों की पहचान होती है।“
समझदारी से भरा होता है रिश्ता
20 की उम्र वाली दोस्ती के मुकाबले 30 की दोस्ती में एक अलग तरह की समझदारी होती है।
- कोई शिकायत नहीं: इस उम्र में अगर मैसेज का जवाब देने में देरी हो जाए, तो सहेलियां शिकायत नहीं करतीं, बल्कि एक-दूसरे की व्यस्तता को समझती हैं।
- छोटी चीजों में खुशी: घंटों बात करने की जगह, सिर्फ एक \“वॉइस नोट\“ ही रिश्ते को तरोताजा और जीवंत रखने के लिए काफी होता है।
इस उम्र तक आते-आते महिलाएं खुद को बेहतर तरीके से समझने लगती हैं और यही वजह है कि उनकी दोस्ती दिखावे से दूर, रूह से जुड़ी और बेहद सुकून देने वाली बन जाती है।
Source: British Journal of Educational Psychology
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