घटना की जानकारी देता मृतक का पुत्र अंगद।
जागरण संवाददाता, उरई। भागो यहां से...चैत्र में जब नहर खाली होगी तब मिलेगा शव...यह शब्द किसी फिल्म के डायलाग की तरफ लग रहे हैं। हकीकत में यह शब्द मकर संक्रांति पर नहर में डूबे पिता को खोजने के लिए थाने में गुहार लगाने गए पुत्र से थाना प्रभारी पंकज कुमार पांडेय ने कहे। इसके बाद पीड़ित कई बार थाने गया लेकिन पुलिस ने डूबे चूड़ी विक्रेता पिता की खोज नहीं की और रविवार को उसका शव घटनास्थल के एक किमी दूर पुलिया में फंसा मिला। पुलिस ने आनन फानन शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजा इसके बाद मृतक के पुत्र को सूचना दी।
ग्राम डुड़ी थाना एरच जिला झांसी निवासी 45 वर्षीय लखन बहेलिया एट में झुग्गी बनाकर परिवार सहित रहता था। वह फेरी लगाकर चूड़ी बेचने का काम करता था। 14 जनवरी मकर संक्रांति पर बैरागढ़ रोड से निकली नहर में सुबह के समय स्नान करने के लिए गया था। इसी दौरान वह नहर में डूब गया। वहां स्नान कर रहे कुछ लोगों ने तुरंत ही लखन के पुत्र अंगद को इसकी जानकारी दी।
पिता के नहर में डूबने पर पुत्र अंगद एट थाने गया जहां पर थाना प्रभारी से कहा कि उसके पिता नहर में डूब गए हैं उनकी खोज करा दीजिए। अंगद पढ़ा लिखा नहीं था इस कारण लिखित में शिकायत नहीं दे सका। इस पर थाना प्रभारी ने कहा कि भागो यहां से...चैत्र में जब नहर खाली होगी तब मिलेगा शव तो इसकी जानकारी दे दी जाएगी। परेशान होकर अंगद अगले दिन फिर थाने गया तो उसे यह कहकर भगा दिया कि रोज शराब पीकर आता है भाग यहां से।
अंगद अन्य स्वजन के साथ रोज नहर किनारे जाता और पिता की खोज करता रहा। पांच दिन बाद रविवार को सुबह किसानों ने नहर पुलिया में शव फंसा देखा तो पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी तुरंत मौके पर पहुंचे और कुछ ही मिनट में शव को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पुत्र को सूचना दी। पिता की मौत के बाद अंगद समेत चार भाई, दो बहनें व मृतक की पत्नी भूरी का रो रोकर बुरा हाल है। थाना प्रभारी ने कहा कि सूचना मिली थी लेकिन आज मिला है।
इस तरह के मामले की उन्हें जानकारी नहीं है। अगर थाना प्रभारी ने मानवीय संवेदनाओं को भी ध्यान में रखकर शव नहीं खोजा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डा. दुर्गेश कुमार, पुलिस अधीक्षक |
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