जागरण पाठक पैनल में भाग लेते धनबाद के जिम्मेदार लोग।
जागरण संवाददाता, धनबाद। मध्यप्रदेश के इंदौर में प्रदूषित जल ने सात लाेगों की इहलीला को समाप्त कर दिया। उसके बाद देश भर में पीने के पानी के सवाल उठे।
हमारे घरों तक पहुंचने वाला पानी किस तरह का है, पानी की जांच को लेकर क्या व्यवसथा है, पाइप लाइन की मरम्मत व मेंटेनेंस को लेकर क्या उपाय हो रहे हैं, आरओ का पानी किस तरह नुकसानदेह है, पानी के संरक्षण के क्या उपाय होने चाहिए, समेत तमाम मुद्दों पर जोरदार चर्चा हुई।
आपके अपने अखबार दैनिक जागरण की ओर से आयोजित पाठक पैनल परिचर्चा में कई क्षेत्र के लोगों ने शिरकत किया। समाजसेवी, नौकरीपेशा, डाक्टर, शिक्षक, सामाजिक संगठन, गृहिणी, स्टूडेंट समेत अन्य क्षेत्रों के लोगों ने परिचर्चा में अपनी बातें रखी।
सबने जल संरक्षण व पानी की स्थिति को बेहतर बनाने की वकालत की। जागरण अभियान हर बूंद हो स्वच्छ, हर घूंट हो स्वस्थ...के तहत आयोजित परिचर्चा में लोगों ने कहा कि घरों तक पीने का पानी पहुंचा देना केवल जरूरी नहीं है। यह पानी कितना शुद्ध है, स्वस्थ है, इस पर भी ध्यान देना चाहिए।
लोगों ने कहा कि जिस प्रकार नगर निगम वायू प्रदूषण को लेकर जगह-जगह बोर्ड लगातार इसकी सूचना देता है। उसी तरह से पानी को लेकर भी बोर्ड के माध्यम से शुद्धता जारी करना चाहिए।
किस इलाके का पानी कितना शुद्ध है। लोगों ने कहा कि पेयजल की स्वच्छता को लेकर नगर निगम, पीएचईडी व माडा समेत पूरी सरकार को जवाबददेह बनना होगा। लोगों ने खुद के स्तर पर भी जागरूकता बरतने व फैलाने का संकल्प लिया।
पेश है परिचर्चा में शामिल लोगों की राय
भूगर्भीय जल बचाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर जागरुकता जरूरी है। स्कूलों में भी हम बच्चों के बीच लगातार यह अभियान चला रहे हैं। प्राय घरों में आने वाली जिला पूर्ति पाइपलाइन का जल दूषित होता है। एजेंसियों को इस संबंध में जगह-जगह टोल फ्री नंबर लगाना चाहिए। जिस किसी भी प्रकार की सूचना अथवा शिकायत की जा सके। लेकिन यहां शिकायत के बावजूद कई दिनों तक समस्याएं दूर नहीं होती।-राजकुमार वर्मा, प्राथमिक शिक्षक, धनबाद
पूरी दुनिया में मात्र एक प्रतिशत पानी पीने योग्य है। लेकिन हम उसका बे हिसाब दोहन कर रहे हैं। लगातार जनसंख्या का बढ़ना इसका एक बड़ा कारण हो रहा है। इसके लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। दूषित पानी से कई गंभीर बीमारियां हो रही है। हर दिन ऐसे मरीज हम लोगों के पास आते हैं। बरसात के दिन में स्थिति और खराब हो जाती है। हम लोगों को परंपरागत जल स्रोत को भी दुरुस्त रखना होगा।-डॉ राकेश इंदर सिंह, सचिव,आईएमए
दूषित पानी से फंगल इन्फेक्शन डायरिया टायफाइड समेत कई गंभीर बीमारी होती है। लगातार दूषित पानी से आगे चलकर किडनी पर भी असर पड़ता है। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण जरूरी है। प्लास्टिक के उपयोग और इसके निदान पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए लोगों को जागरूक होना चाहिए।- डा. जिमी अभिषेक, संयुक्त सचिव, आईएमए
बलियापुर रोड में रहती हूं, जलापूर्ति का पाइप लाइन से आने वाला पानी प्राय गंदा और दूषित होता है। सूचना देने पर इसे ठीक करने में भी समय लग जाता है। पेय जलापूर्ति विभाग को समय-समय पर पानी टंकी की सफाई करनी चाहिए। वाटर का लगातार ट्रीटमेंट होना चाहिए। यह कई बीमारियों को जन्म देता है। नगर निगम व पीएचईडी को टोल फ्री नंबर जारी करना चाहिए ताकि लोग शिकायत सही जगह कर सकें।-नीलू कुमारी गर्ग, गृहिणी, बलियापुर रोड
धनबाद में पानी का लीकेज होना एक बड़ी समस्या है। वाटर हार्वेस्टिंग पर कोई काम नहीं हो रहा है। इस दिशा में ध्यान देने की जरूरत है। सड़क किनारे विभाग में जो भी पौधे लगाए थे, सब बर्बाद हो गए हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण होना बेहद जरूरी है। कई जगहों पर नाल लगे हैं, लेकिन उसे लगातार पानी बहता रहता है।-राजकुमार सिंह, अध्यक्ष लायंस क्लब, सवेरा
हाल के दिनों में हमारी एक टीम सिक्किम गई थी, वाहन सड़कों पर प्लास्टिक और कचरा फेंकना मना है। लेकिन हमारे यहां ऐसी सोच विकसित नहीं होती। यह स्थिति जल संरक्षण को भी लेकर है। हमें जितना आवश्यक है, उतना ही पानी का उपयोग करें। घरों तक शुद्ध पानी जाए यह प्रशासन और संबंधित विभाग की जिम्मेवारी होनी चाहिए। दुर्भाग्य से निगम व पीएचईडी शहर में अपनी जिम्मेवारी से भागते हैं।-उत्कर्षा चौधरी, छात्रा बीबीएमकेयू
विश्व साहित्य में एक जगह कहा गया है कि इंसान अब तक जिस चीज पर कब्जा नहीं कर सका, वह पानी है। धरती को जल से निर्मित भी बताया गया है। ऐसे में लोगों के हलक तक जाने वाला पानी वाकई शुद्ध होना चाहिए। हाल के दिनों में भरोसे का संकट बढ़ा है। निगम या पीएचईडी को यह साबित करना होगा कि लोग उनके पानी पर भरोसा करें। पानी के पाइप लाइन की सर्वे के साथ ही जनता की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। ओडिशा के पुरी में नल के जल का जिस तरह का भरोसा है, देश के दूसरे शहरों के निगम को भी उनसे सीखने की दरकार है।-कमलेश, कहानीकार
जल संरक्षण के लिए पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है। पहले हीरक रोड पर चलने पर चारों ओर हरा-भरा पेड़ रहता था। लेकिन सड़क चोरी करने में यह सभी पेड़ खत्म हो गए। इसकी जगह पर दूसरे जगह पेड़ भी नहीं लगाई गई। कई जगहों पर सरकारी पाइपलाइन का पानी लीकेज हो रहा है। अफसर कॉलोनी में भी कई जगह पानी का लीकेज होता है। इन पर संबंधित विभाग को ध्यान देने की जरूरत है।-कुमारी नीलू, जिला उद्यमी समन्वयक, जिला उद्योग केंद्र
जल संरक्षण को लेकर सभी को जागरूक होना चाहिए। मैथन से धनबाद को पानी मिल रहा है। लेकिन इस पानी की स्वच्छता को लेकर भी विभाग को ध्यान देने की जरूरत है। कई जगहों पर लीकेज हो जाते हैं विभाग को चाहिए कि इसकी सूचना मिलते ही इसे तुरंत ठीक करें। लेकिन दुर्भाग्य ऐसा नहीं हो पता। निगम व पीएचईडी को अपनी जिम्मेवारी को ठीक से निभाना होगा ताकि इंदौर जैसी घटना दूसरे जगह न हो।-उदय कुमार सिंह, समाजसेवी
हम लोग दामोदर नदी से पानी पीते हैं, पहले तो इस जिला पूर्ति पाइपलाइन के पानी को शुद्ध रखना चाहिए। वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। नगर निगम की ओर से जगह-जगह पानी टेस्टिंग के लिए बोर्ड लगाना चाहिए जिस तरीके से प्रदूषण के लिए बोर्ड लगाए गए हैं। हम जो पानी पी रहे हैं वह कितना सुरक्षित है इसकी जानकारी हर नागरिक को लेना कर्तव्य है।-अनिल जैन, समाजसेवी
हर घर नल लगाया जाए। और वहां तक साफ और स्वच्छ पानी मिले इसके लिए विभाग को सक्रिय रहना होगा। स्थिति यह है कि स्वच्छ पानी नहीं मिलने के कारण आज काफी संख्या में लोग पानी खरीद के पी रहे हैं। ऐसे में जिला पूर्ति होने वाली पाइप की पानी की टेस्टिंग भी नियमित होनी चाहिए और इसकी जानकारी आम लोगों को भी मिलनी चाहिए।-दिनेश पुरी, समाजसेवी
जल संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक करें। कई जगहों पर पानी की बर्बादी होती रहती है, लेकिन विभाग चुप रहता है, जबकि लोगों को भी इससे कोई असर नहीं होता है। लोगों में यह सेंस विकसित करना होगा, कि जो पानी सड़कों पर, घरों में व्यर्थ बह रहा है, वह पानी केवल एक आदमी का नहीं है, बल्कि समुदाय का है। वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर सख्त नियम बनाने व पेयजल की सप्लाई को दुरुस्त व जवाबदेह बनाने की जरूरत है।-आरके गर्ग, असिस्टेंट इनकम टैक्स कमिश्नर, धनबाद
हर बूंद हो स्वच्छ, हर घूंट हो स्वस्थ की जवाबदेही सरकार व सरकार से जुड़े संबंधित अंगों की है। हमलोग शहर में पानी की सप्लाई को लेकर काफी परेशानी उठा रहे हैं। कई बार तो चार चार दिन तक पानी नहीं आता, लेकिन यहां अब तक कोई केंद्रीकृत व्यवस्था तक नहीं हो पाई है। पाइपलाइन के लीकेज की शिकायत दूर करने में भी निगम, पीएचइडी व माडा एक दूसरे पर टालमटोल करते हैं। निगम सिर्फ पैसे वसूलने के लिए थोडे न है। उनको जनता के लिए जवाबदेह बनाना होगा। अगर गंदा पानी की आपूर्ति हुई तो अफसरों पर कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।-कुलदीप कुमार सिंह, जलछाजन कर्मी |