Ganesh Jayanti 2026: गणेश जयंती शुभ मुहूर्त।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है। हर महीने में दो चतुर्थी आती हैं, लेकिन माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व है। इसे गणेश जयंती, माघी गणेश चतुर्थी, तिलकुंद चतुर्थी और वरद चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। साल 2026 में गणेश जयंती (Ganesh Jayanti 2026) की सही तारीख को लेकर कुछ लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन है। आइए इसकी सही तारीख जानते हैं।
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कब है गणेश जयंती? (Ganesh Jayanti 2026 Kab Hai?)
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 47 मिनट पर होगी। वहीं, इसकी समाप्ति 23 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 28 मिनट पर होगी। उदया तिथि को देखते हुए 22 जनवरी 2026, गुरुवार के दिन गणेश जयंती मनाई जाएगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त (Ganesh Jayanti 2026 Puja Muhurat)
- सुबह 11:28 से दोपहर 01:42 तक।
गणेश जयंती की सरल पूजा विधि (Ganesh Jayanti 2026 Puja Rituals)
- सुबह जल्दी स्नान कर लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
- बप्पा के सामने व्रत का संकल्प लें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- गणेश जी को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं।
- सिंदूर का तिलक लगाएं।
- उन्हें 21 दूर्वा की गांठें और लाल फूल अर्पित करें।
- गणेश जी को उनके प्रिय मोदक या मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
- अंत में गणेश चालीसा, चतुर्थी कथा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती करें।
गणेश जयंती का महत्व (Ganesh Jayanti 2026 Significance)
ऐसी मान्यता है कि माघ महीने की इस चतुर्थी पर जो लोग व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसे \“तिलकुंद चतुर्थी\“ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस दिन तिल का दान और तिल से बनी चीजों का सेवन करना शुभ माना जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से कुंडली से बुध दोष शांत होते हैं और अपार ज्ञान व विद्या की प्राप्ति होती है।
न करें चंद्रमा दर्शन
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठा आरोप लगने का डर रहता है। ऐसे में इस तिथि पर चंद्र दर्शन से बचें।
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