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सीटी यूनिवर्सिटी शोध में खुलासा; दक्षिण-पश्चिम पंजाब के भूजल में खतरनाक स्तर तक पहुंची यूरेनियम मात्रा

cy520520 1 hour(s) ago views 573
  

सीटी विश्वविद्यालय के शोध से खुलासा।  



जागरण संवाददाता,जगराओ। सीटी विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के सहायक अधिष्ठाता डॉ. सतवीर सिंह के नेतृत्व में किए गए कई महत्वपूर्ण और अग्रणी शोध अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि पंजाब के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों के अनेक जिलों के भूजल में यूरेनियम की मात्रा अत्यंत खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। यह स्थिति न केवल जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, सतत विकास और भविष्य की जल सुरक्षा को लेकर भी गहरी चिंता उत्पन्न करती है।

यह जानकारी सीटी विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर डॉ. मनबीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि यह सीटीयू के सहायक अधिष्ठता डा. सतवीर सिंह द्वारा किया गया शोध है। यह शोध आरयूएसए 2.0 अनुसंधान अनुदान के अंतर्गत गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के सहयोग से तथा टोक्यो मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय, जापान के साथ अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय अनुसंधान परियोजना के माध्यम से किया गया।

इस व्यापक अध्ययन में भूजल में यूरेनियम की मात्रा, उससे उत्पन्न स्वास्थ्य जोखिम, इसके वितरण को नियंत्रित करने वाले कारक तथा संभावित उपचार एवं निवारण उपायों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया।

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यूरेनियम की स्थिति चिंताजनक

सहायक अधिष्ठता डाॅ.सतवीर सिंह ने बताया कि विभिन्न जिलों में यूरेनियम की चिंताजनक स्थिति शोध के दौरान विभिन्न जिलों में भूजल में यूरेनियम की मात्रा निम्नलिखित पाई गई । जिसमें बठिंडा: 0.8 से 531.8 माइक्रोग्राम प्रति लीटर, मानसा: 0.5 से 475.1 माइक्रोग्राम प्रति लीटर, मोगा: 0.2 से 360.2 माइक्रोग्राम प्रति लीटर, बरनाला: 0.1 से 122.3 माइक्रोग्राम प्रति लीटर।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ, 2011) के अनुसार पीने के पानी में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर निर्धारित है। परंतु अध्ययन में यह पाया गया कि बड़ी संख्या में नमूने इस सीमा से कहीं अधिक थे।

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बठिंडा में 63 प्रतिशत नमूने फेल

बठिंडा के 63 प्रतिशत नमूने सुरक्षित सीमा से अधिक, मानसा में 67 प्रतिशत नमूने सुरक्षित सीमा से अधिक, मोगा: 43 प्रतिशत नमूने सुरक्षित सीमा से अधिक, बरनाला: 50 प्रतिशत नमूने सुरक्षित सीमा से अधिक। शोध में यह भी सामने आया कि 200 फीट से कम गहराई वाले भूजल स्रोत सबसे अधिक प्रभावित हैं।

जैसे-जैसे जल स्रोत की गहराई बढ़ती है, यूरेनियम की मात्रा में कमी आती है, जिससे गहरे जल स्रोत तुलनात्मक रूप से अधिक सुरक्षित पाए गए। इसका जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इसका हानिकारक है। ऐसे जल का नियमित उपयोग स्थानीय निवासियों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।

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जानें यूरेनियम प्रदूषण के प्रमुख कारण

शोध के अनुसार भूजल में यूरेनियम प्रदूषण के पीछे निम्नलिखित कारण प्रमुख हैं प्राकृतिक भूगर्भीय संरचना (प्राकृतिक कारण), रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग,भूजल का लगातार और अनियंत्रित दोहन, औद्योगिक एवं घरेलू अपशिष्ट का जल स्रोतों में प्रवाह। लगातार भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण जल स्तर में गिरावट आ रही है, जिससे ऑक्सीकरण की स्थिति उत्पन्न होती है।

ऐसी परिस्थितियां यूरेनियम को पानी में घुलनशील बनाती हैं और इसके प्रसार को बढ़ावा देती हैं। इस अध्ययन के अंतर्गत कुछ उन्नत और नवीन उपचार तकनीकों पर भी शोध किया गया, जिनमें शामिल हैं मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स, मेसोपोरस सिलिका पदार्थ, मेटल ऑक्साइड नैनो सामग्री । इन आधुनिक सामग्रियों ने पानी से यूरेनियम को अवशोषित करने में उच्च दक्षता प्रदर्शित की है।

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