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जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड में जमशेदपुर के प्रमुख उद्योगपति देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले ने पूरे जिले की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी कैरव का सुराग न मिलने से व्यापारियों और राजनीतिक दलों में भारी आक्रोश है। हालांकि, सोमवार को राज्य की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने जल्द ही मामले के खुलासे का आश्वासन दिया है। झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता व पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने डीजीपी तदाशा मिश्रा से मुलाकात कर कैरव गांधी की सकुशल रिहाई की मांग की। डीजीपी ने जानकारी दी कि पुलिस की विशेष टीमें पूरी तत्परता से काम कर रही हैं और तकनीकी साक्ष्यों (Technical Surveillance) के जरिए अहम सुराग हाथ लगे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिस की दिशा सही है और जल्द ही कैरव अपने परिवार के बीच होंगे। इस दौरान षाड़ंगी ने गालूडीह के तारापदो महतो हत्याकांड का मुद्दा भी उठाया, जिस पर डीजीपी ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही।
आजसू ने पुलिस की कार्यशैली पर जताई चिंता शहर की बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आजसू पार्टी ने सिटी एसपी को ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष कन्हैया सिंह ने कहा कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी अपराधियों का गिरफ्त से बाहर होना चिंताजनक है। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि कैरव की सकुशल वापसी नहीं हुई, तो पार्टी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। इस मौके पर संजय मालाकार और अप्पू तिवारी सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पीड़ित परिवार के साथ खड़ा हुआ मारवाड़ी समाज पूर्वी सिंहभूम जिला मारवाड़ी सम्मेलन का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाध्यक्ष मुकेश मित्तल के नेतृत्व में व्यवसायी देवांग गांधी के आवास पहुंचा। समाज के सदस्यों ने परिवार को ढांढस बंधाया और बच्चे की सलामती की प्रार्थना की। मारवाड़ी सम्मेलन ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि व्यापारियों और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि शहर में डर का माहौल खत्म हो सके। प्रतिनिधिमंडल में नंद किशोर अग्रवाल, प्रदीप मिश्रा और बिमल अग्रवाल जैसे वरिष्ठ सदस्य शामिल थे।
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने न केवल जमशेदपुर बल्कि पूरे झारखंड के पुलिस महकमे को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। अब सबकी निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई और कैरव की सुरक्षित घर वापसी पर टिकी हैं। |