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बांग्लादेश में हिंसा। (फाइल)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश में वहां की सरकार ने 2025 में मारे गए गैर मुस्लिमों और मंदिरों व अन्य आराधना स्थलों पर हुए हमलों के मामलों को गैर सांप्रदायिक करार दिया है। कहा है कि उस समय हुई हिंसा के ज्यादातर मामले किसी धर्म विशेष के विरुद्ध नहीं बल्कि आपराधिक कृत्य थे।
बांग्लादेश सरकार का यह बयान भारत के उस वक्तव्य पर आया है जिसमें अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों में शामिल लोगों पर तेजी से और स्पष्ट कार्रवाई के लिए कहा गया था।
भारत सरकार ने नौ जनवरी को दिए बयान में स्थितियों को मुश्किल पैदा करने वाला बताया था। भारत सरकार का यह बयान हाल के हफ्तों में अलग-अलग घटनाओं में कई हिंदुओं की हत्याओं के बाद आया था। बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि 2025 में जनवरी से लेकर दिसंबर तक हुई 645 घटनाओं की समीक्षा में पाया गया कि उनमें से ज्यादातर आपराधिक कृत्य थीं। उनके पीछे सांप्रदायिक कारण नहीं थे। यह बात बांग्लादेश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस के कार्यालय ने कही है।
बांग्लादेश ने कहा है कि देश में होने वाली हर अप्रिय घटना चिंताजनक है लेकिन उसके कारण को देखा जाना भी जरूरी है। बयान में कहा गया है कि 645 घटनाओं में से 71 में सांप्रदायिक कारण पाए गए हैं। इनमें 38 घटनाएं मंदिरों में तोड़फोड़ होने, आठ घटनाएं मंदिरों में आग लगाए जाने और एक घटना मंदिर में चोरी की है।
इसके अतिरिक्त 23 घटनाओं में मंदिरों में मूर्तियां तोड़े जाने की धमकी, भड़काऊ इंटरनेट मीडिया पोस्ट और आराधना स्थल परिसर को नुकसान पहुंचाए जाने की है। इन घटनाओं में एक व्यक्ति की हत्या भी हुई है।
बयान में बताया गया है कि इन घटनाओं के लिए पुलिस स्टेशनों में 50 मामले दर्ज हुए हैं और उनमें इतने ही लोगों की गिरफ्तारी हुई है। बांग्लादेश ने बताया है कि 574 घटनाएं आपराधिक या सामाजिक कारणों से हुई हैं। ये मामले पड़ोसियों के बीच लड़ाई, जमीन को लेकर विवाद, चोरी, व्यक्तिगत दुश्मनी और दुष्कर्म जैसे अपराधों के थे। इन घटनाओं में 172 अप्राकृतिक मौतें हुई थीं। पुलिस ने इन मामलों में कुल 390 FIR दर्ज की हैं और 498 लोगों को गिरफ्तार किया है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ) |
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