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एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। भारत इस वर्ष अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर राज्यों की सुंदर झाकियों को प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही इस दिन भारत के वीर जवान भी अपने शौर्य का परिचय देंगे। गणतंत्र दिवस भारत के लिए एक मामूली दिन नहीं, बल्कि इसी दिन 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान को लागू किया गया था। भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने इसी दिन 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र देश बनाने की घोषणा की थी।
लोकतंत्र की आत्मा है संविधान
यह दिन भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिनों के रूप में गिना जाता है। इसी दिन संविधान लागू करके भारत देश को एक लोकतांत्रिक, संप्रभु तथा गणतंत्र देश घोषित किया गया था। ऐसे में गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय संविधान का विशेष महत्व है। भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की आत्मा हैं, जो लोकतंत्र के मूल्यों को दर्शाती है।
इसलिए गणतंत्र दिवस के मौके पर आज इस लेख के जरिये हम आपको भारतीय संविधान से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं और एक जिम्मेदार नागरिक के तौर संविधान से जुड़ी ये प्रमुख बातें आपको अवश्य पता होनी चाहिए।
क्या है संविधान
संविधान नियमों एवं उप-नियमों का एक ऐसा लिखित दस्तावेज होता है, जिसके अनुसार देश का संचालन किया जाता है। भारतीय संविधान विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की स्थापना एवं राज्यों और जनता के बीच संबंधों को दर्शाता है।
भारत में पहली बार संविधान का विचार
भारत में पहली बार संविधान सभा के गठन का विचार 1934 में वामपंथी नेता एमएन रॉय द्वारा रखा गया था। इसके बाद साल 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत के संविधान के लिए वयस्क मताधिकार की बात रखी। हालांकि नेहरू की इस बात को ब्रिटिश शासन ने मान लिया और इस प्रस्ताव को साल 1940 के \“अगस्त प्रस्ताव\“ के नाम से जाना जाता है। इसके बाद ब्रिटिश सरकार की ओर से साल 1942 में \“क्रिप्स मिशन\“ भारत में भेजा गया, जिसे मुस्लिम लीग ने अस्वीकार कर दिया।
संविधान सभा के अध्यक्ष
भारतीय संविधान सभा का गठन साल 1946 में किया गया था और संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को नियुक्त किया गया था। हालांकि संविधान लिखने का जिम्मा डॉ. बीआर आंबेडकर की अध्यक्षता वाली ड्राफ्टिंग कमेटी को सौंपी गई थी। डॉ. बीआर आंबेडकर ने साल 1948 में संविधान की प्रारूप पेश किया।
संविधान में कई बदलाव के बाद 26 नवंबर, 1949 संविधान को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई। हालांकि भारत में संविधान को 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था।
इतने दिनों में हुआ तैयार
भारतीय संविधान को बनने में कुल दो साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा है। संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए कुल 114 बैठकें हुई थी और संविधान को पूरी तरह से तैयार करने के दौरान लगभग 2000 से संशोधन किए गए थे।
दुनिया का सबसे लंबा संविधान
भारतीय संविधान को दुनिया का सबसे लंबा और लिखित संविधान के रूप में मान्यता प्राप्त है। भारतीय संविधान में कुल 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियां और 22 भाग थे। हालांकि समय से साथ-साथ संविधान में कई संशोधन किए गए। कई संशोधनों के बाद वर्तमान में संविधान में कुल 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 25 भाग हैं।
इतनी बार हुए संशोधन
भारतीय संविधान में अब तक कुल 106 बार संशोधन हुए हैं। भारतीय संविधान में पहला संशोधन 18 जून, 1951 को किया गया था। इसके साथ ही संविधान में अंतिम बार संशोधन साल 2023 में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के उद्देश्य से किया गया था।
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