सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर से खुलने वाली और यहां से होकर गुजरने वाली विक्रमशिला एक्सप्रेस, अंग एक्सप्रेस, सूरत वीकली, मुंबई एलटीटी, जमालपुर-हावड़ा सुपर एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल में तत्काल बुकिंग के लिए ओटीपी अनिवार्य किया गया है। आनलाइन या काउंटर से टिकट बुक करते समय मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को वेरिफाई करना अनिवार्य है।
तत्काल टिकट बुकिंग व्यवस्था में एक ऐसा बदलाव किया है, जिसे आम यात्रियों के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। लंबे समय से यह शिकायत रही है कि तत्काल टिकट आम यात्रियों की बजाय दलालों और एजेंटों के हाथ लग जाते हैं। लेकिन अब रेलवे ने ओटीपी आधारित सत्यापन प्रणाली लागू करके इस समस्या पर काफी हद तक लगाम लगा दी है। नया सिस्टम पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और यात्रियों के हित में बनाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो यात्री सच में यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें ही तत्काल टिकट मिले न कि साफ्टवेयर या फर्जी अकाउंट से बुकिंग करने वाले एजेंटों को।
तत्काल टिकट योजना क्या है और कैसे काम करती है
तत्काल योजना रेलवे की एक विशेष आरक्षण व्यवस्था है, जो उन यात्रियों के लिए होती है जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है। इस योजना के तहत यात्रा की तारीख से एक दिन पहले टिकट बुक करने की सुविधा दी जाती है।
एसी श्रेणी के लिए तत्काल टिकट सुबह 10 बजे खुलते हैं, जबकि नान-एसी श्रेणी के लिए बुकिंग दिन के 11 बजे शुरू होती है। सीटों की संख्या सीमित होती है और यही वजह है कि पहले कुछ ही मिनटों में टिकट खत्म हो जाते थे। लेकिन नए नियमों के बाद अब सीटों का वितरण ज्यादा निष्पक्ष हो गया है।
ओटीपी आधारित नया सिस्टम से तत्काल टिकट बुकिंग के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। चाहे आप आइआरसीटीसी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से टिकट बुक करें या फिर रेलवे काउंटर से, हर स्थिति में आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा।
ओटीपी दर्ज करने के बाद ही टिकट बुकिंग पूरी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि एक ही व्यक्ति या एजेंट कई अकाउंट से एक साथ टिकट बुक न कर सके। रेलवे का दावा है कि इस सिस्टम से फर्जी बुकिंग लगभग खत्म हो चुकी है और पारदर्शिता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ी है। पहले तत्काल टिकट बुकिंग के शुरुआती कुछ मिनटों में एजेंट अपने खास साफ्टवेयर और बाट्स के जरिए सीटें ब्लाक कर लेते थे।
आम यात्रियों को वेबसाइट स्लो होने या सीट खत्म होने की समस्या का सामना करना पड़ता था। अब नए नियमों के तहत बुकिंग के शुरुआती 30 मिनट तक एजेंटों पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा हर यात्री के मोबाइल पर अलग-अलग ओटीपी भेजा जाता है। जिससे बल्क बुकिंग संभव नहीं रह गई है। यही वजह है कि एजेंट और दलाल अब इस सिस्टम में टिक नहीं पा रहे हैं।
कौन कर सकता है तत्काल टिकट बुकिंग
तत्काल टिकट बुकिंग कोई भी भारतीय नागरिक कर सकता है, जिसके पास वैध आइआरसीटीसी अकाउंट हो। अकाउंट का आधार कार्ड से लिंक होना अब अनिवार्य कर दिया गया है। एक समय में अधिकतम चार यात्रियों के लिए टिकट बुक किया जा सकता है। लेकिन हर यात्री के लिए अलग ओटीपी जरूरी होता है। महिलाएं, बुजुर्ग और नाबालिग सभी इस योजना के अंतर्गत आते हैं। रेलवे काउंटर से टिकट लेने पर भी मोबाइल नंबर देना अनिवार्य है। अगर दिया गया नंबर गलत या बंद पाया गया, तो टिकट रद भी किया जा सकता है।
तत्काल टिकट बुकिंग के नए सिस्टम के फायदे
नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना काफी बढ़ गई है। दलालों के हटने से सीटें वास्तविक यात्रियों को मिल रही हैं। बुकिंग प्रक्रिया पहले से ज्यादा सुरक्षित और तेज हो गई है। त्योहारों, शादी-ब्याह और छुट्टियों के सीजन में यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।
तत्काल टिकट के लिए जरूरी दस्तावेजतत्काल टिकट बुक करने के लिए कुछ बुनियादी चीजें जरूरी हैं। सबसे पहले आपका आइआरसीटीसी यूजर आइडी और पासवर्ड होना चाहिए। आपका अकाउंट आधार कार्ड से लिंक होना जरूरी है। ओटीपी प्राप्त करने के लिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर सक्रिय होना चाहिए। यात्रा के समय पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी साथ रखना जरूरी है। डिजिटल ई-आधार भी मान्य है।
काउंटर बुकिंग के समय फार्म में मोबाइल नंबर साफ और सही लिखना बहुत जरूरी है। अगर नंबर आइआरसीटीसी प्रोफाइल से लिंक नहीं है, तो पहले उसे अपडेट करना चाहिए। |
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