NHAI Road Project: रिविजनल सर्वे के आधार पर खतियान से कराया गया मिलान, रैयतों के बीच आपसी सहमति की भी प्रक्रिया पूर्ण। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Sahebganj Manikpur Fourlane: साहेबगंज–मानिकपुर एनएच-19 डब्ल्यू (पटना–बेतिया फोरलेन) के निर्माण में लंबे समय से चली आ रही भूमि उपलब्धता की समस्या अब लगभग समाप्त हो गई है। करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में भूमि नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य बाधित था, लेकिन अब अधिकांश मौजा में भूमि चिन्हित कर ली गई है।
केवल एक मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण थोड़ी देरी की आशंका बनी हुई है।मिली जानकारी के अनुसार, भूमि को लेकर रैयतों के बीच आपसी विवाद के कारण यह परियोजना पिछले छह माह से अधिक समय तक प्रभावित रही।
संयुक्त रूप से कार्रवाई शुरू
हाल ही में भू-अर्जन निदेशक द्वारा इस मामले की समीक्षा की गई, जिसके बाद जिला प्रशासन और एनएचएआइ को भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।इसके आलोक में एनएचएआइ और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से कार्रवाई शुरू की।
रिविजनल सर्वे के आधार पर खतियान का मिलान कराया गया और संबंधित रैयतों से संवाद स्थापित कर आपसी सहमति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इससे अब भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है और निर्माण कार्य को गति मिलेगी।
406 करोड़ रुपये का आवंटन
उल्लेखनीय है कि साहेबगंज–मानिकपुर फोरलेन पटना–बेतिया फोरलेन परियोजना का अहम हिस्सा है। इस खंड के लिए एनएचएआइ द्वारा कुल 406 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसमें से करीब 83 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान अभी शेष है।
कम होगी पटना-बेतिया की दूरी
परियोजना के पूरा होने के बाद पटना से बेतिया की यात्रा मात्र ढाई से तीन घंटे में पूरी की जा सकेगी, जबकि वर्तमान में यह सफर सात घंटे से अधिक का हो जाता है। इसके साथ ही यह फोरलेन उत्तरी बिहार के वैशाली, सारण, सिवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण को पटना व नेपाल सीमा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पर्यटन व उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
यह सड़क परियोजना वैशाली, केसरिया जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व तक पहुंच को भी आसान बनाएगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। |