पटना में रामचक बैरिया स्थित कूड़े का ढेर। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी में वर्षों से जमा 13 लाख टन से अधिक पुराने कचरे (लीगेसी वेस्ट) के निस्तारण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। देशभर में डंपसाइट की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (ड्रैप) के तहत पटना को प्रमुख शहरों में शामिल किया गया है। इस पहल से न केवल शहर की स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
ड्रैप कार्यक्रम आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन–शहरी 2.0 के अंतर्गत मिशन-मोड में शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देशभर में वर्षों से खुले डंपसाइट पर जमा कचरे की वैज्ञानिक विधि से सफाई कर अक्टूबर 2026 तक ‘शून्य डंपसाइट’ का लक्ष्य हासिल करना है। लीगेसी वेस्ट वह कचरा होता है, जो लंबे समय तक खुले में पड़ा रहने से जहरीली गैसों, दुर्गंध, जल व भूमि प्रदूषण तथा गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।
देशभर में ड्रैप के तहत 203 शहरी निकायों के 214 बड़े डंपसाइट चिह्नित किए गए हैं, जिन पर देश के लगभग 80 प्रतिशत पुराने कचरे का बोझ है। बिहार से इस कार्यक्रम में पटना, भागलपुर, बेतिया, दानापुर, मुजफ्फरपुर, कटिहार, सासाराम और डेहरी (डालमिया नगर) को शामिल किया गया है। इनमें पटना सबसे अधिक प्रभावित शहरों में है, जहां अकेले करीब 13 लाख टन से ज्यादा पुराना कचरा जमा है। यह कचरा रामचक बैरिया में है।
कार्यक्रम के तहत कचरे के निस्तारण की प्रगति की निगरानी जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाएगी। इसके साथ ही निजी एजेंसियों की भागीदारी, आधुनिक मशीनों का उपयोग, जीपीएस आधारित निगरानी और जनजागरूकता अभियानों पर जोर दिया गया है। खास बात यह है कि नए कचरे को डंपसाइट पर जाने से रोकने के लिए स्रोत पर ही कचरा पृथक्करण और प्रोसेसिंग को अनिवार्य बनाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि ड्रैप के सफल क्रियान्वयन से न केवल पुराने कचरे के पहाड़ खत्म होंगे, बल्कि खाली हुई भूमि का उपयोग हरित क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाओं या अन्य विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इससे पटना समेत अन्य शहरों में स्वच्छता, पर्यावरण सुरक्षा और नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है। |