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आईआईटी कानपुर के प्रणव अस्थाना ने बनाया एआई यूरिन एनलाइजर, 15 सेकंड में मिलेगी 10 बीमारियों की रिपोर्ट

LHC0088 1 hour(s) ago views 602
  



संतोष शुक्ल, लखनऊ। नई तकनीक और एआइ का सटीक प्रयोग चिकित्सा विज्ञान की दुनिया बदल रहा है। आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एमटेक लखनऊ निवासी प्रणव अस्थाना ने ऐसा स्ट्रिप एनलाइजर विकसित किया है, जिस पर यूरिन की दो बूंद डालकर मोबाइल से स्कैन करने पर लिवर, किडनी, हार्मोन्स, यूरिनल ट्रैक इंफेक्शन, इकोलाई बैक्टीरिया, यूरिन में प्रोटीन जाने एवं पीएच मान समेत दस प्रकार की बीमारियों की जानकारी सिर्फ 15 सेकंड में प्राप्त की सकेगी। लखनऊ में आयोजित यूपी हेल्थ टेक कान्क्लेव में यह प्रोजेक्ट काफी चर्चा में रहा।

स्ट्रिप की कीमत मात्र दस रुपए है। घर बैठा व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की प्राथमिक जानकारी 98 प्रतिशत सटीकता के साथ जान सकेगा। उसे पैथ लैबों के चक्कर काटने एवं महंगी जांचों से निजात मिलेगी। स्टार्ट अप इंडिया में चयनित इस प्रोजेक्ट की तकनीक का प्रयोग गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, ग्रेटर नोएडा की ओपीडी में किया जा रहा है।

एसजीपीजीआई, राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान और बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर ने अपने यहां ट्रायल के लिए बुलाया है।

प्रणव अस्थाना ने लखनऊ में फरवरी 2025 में प्रोजेक्ट शुरू कर नवंबर में पूरा किया। नई दिल्ली की एनएबीएल लैब सिटी इमेजिंग सेंटर में पहली बार परीक्षण किया, जहां जांच रिपोर्ट 98 प्रतिशत सटीक मिली। अब तक तीन सौ मरीजों पर स्टडी की जा चुकी है।

12 और 13 जनवरी को लखनऊ में आयोजित एआइ हेल्थ कांफ्रेंस में जिम्स नोएडा के साथ मिलकर स्टाल लगाया, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक समेत कई मेडिकल कालेज के चिकित्सकों ने भी देखा।

प्रणव ने बताया कि यह स्ट्रिप रीडर और मोबाइल एप बिलियन टेस्ट नामक हेल्थकेयर टेक्नोलोजी के प्लेटफार्म पर विकसित किया गया है। बाजार में आने वाले स्ट्रिप एनलाइजर की कीमत दो लाख रुपये से ज्यादा है। यह तकनीक पूरी तरह भारतीय है, जिसे कई विदेशी ब्रांडों का बेहतर विकल्प बताया जा रहा है।

दावा किया है कि विदेशी यूरिन एनलाइजर एक प्रकार की जांच करने में सक्षम हैं, जहां यह एनलाइजर वर्तमान में दस और आने वाले दिनों में 30 प्रकार की जांचें कर सकता है।

जिम्स नोएडा में सेंटर फार मेडिकल इनोवेशन के चीफ एक्जीक्यूटिव अफसर डा. राहुल सिंह ने बताया कि यह तकनीक सुदूर गांवों में पैथोलोजी की जांच आसान कर देगी। यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, हेल्थ कैंपों, बुजुर्गों एवं पशुओं के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। हर लैब की जांच रिपोर्ट में अंतर होता है लेकिन यहां ऐसा नहीं होगा। मरीज का रिकार्ड डाटा़ बैंक में सुरक्षित भी रहेगा।
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