राज्य ब्यूरो, लखनऊ। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने गुरुवार को 14 जिलों में बनाए गए 18 वृहद गो संरक्षण केंद्रों का वर्चुअल लोकार्पण किया। इनमें 7400 निराश्रित गोवंशी को आश्रय और संरक्षण मिल सकेगा।
पशुपालन निदेशालय में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने शेष 209 गो संरक्षण केंद्रों का निर्माण जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। कहा कि केंद्रों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। गो संरक्षण कार्यों में स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाए।
गुरुवार को लोकार्पित गो संरक्षण केंद्रों में मीरजापुर के तीन, बरेली व कानपुर देहात के दो-दो और आजमगढ़, कासगंज, उन्नाव, बुलंदशहर, श्रावस्ती, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, सुलतानपुर, फिरोजाबाद, रायबरेली व बदायूं के एक-एक केंद्र शामिल हैं।
कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि अब तक 630 वृहद गो संरक्षण केंद्रों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है, इनमें 421 केंद्रों का निर्माण हो चुका है और 410 का संचालन भी शुरू हो चुका है। प्रत्येक केंद्र की क्षमता 400 गोवंशी के संरक्षण की है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में 6503 अस्थायी गो आश्रय स्थल, 421 वृहद गो संरक्षण केंद्र व 259 कांजी हाऊस और शहरी क्षेत्र में 314 कान्हा गो आश्रय स्थलों संचालित हैं। इनमें 12,38,447 निराश्रित गोवंशी संरक्षित है। वहीं सहभागिता योजना के तहत 1,13,631 लाभार्थियों को 1,81,418 निराश्रित गोवंश सिपुर्द किए गए हैं। सरकार द्वारा गोवंशी के संरक्षण पर प्रतिदिन लगभग 6.5 करोड़ रूपये खर्च किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा गो आश्रय स्थलों को स्वावलंबी बनाने के लिए गाय के गोबर से गो दीप, धूपबत्ती, गोलाग, गोबर के गमले, वर्मी कम्पोस्ट और बायोगैस उत्पादन इकाइयों की स्थापना की जा रही है। इनके संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने आठ मार्च तक चलने वाले राष्ट्रीय खुरपका, मुहपका रोग नियंत्रण अभियान के 7वें चरण का भी शुभारंभ किया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम,विशेष सचिव देवेंद्र कुमार पांडेय, निदेशक प्रशासन एवं विकास डा. मेमपाल सिंह, निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डा. राजेंद्र प्रसाद आदि उपस्थित थे। |