इलेक्ट्रिक वाहनों में अब इंजन जैसी आवाज होगी अनिवार्य।
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) तेजी से पॉपुलर हो रही हैं। ये कम प्रदूषण करती हैं, चलाने में किफायती होती हैं और शहरों में ट्रैफिक के बीच भी स्मूद ड्राइविंग देती हैं। EVs की एक बड़ी चुनौती हमेशा से रही है कम स्पीड पर इनसे एकदम आवाज नहीं आती है। यही खामोशी कई बार पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों और बुजुर्गों के लिए जोखिम बन जाती है, क्योंकि उन्हें सामने से आती गाड़ी का अंदाजा नहीं लग पाता। अब इसी खतरे को कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। अक्टूबर से इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर्स में लो-स्पीड पर आर्टिफिशियल साउंड देना अनिवार्य किया जाएगा।
क्या है नया अपडेट?
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के डायरेक्टर रेजी माथाई ने बताया है कि अक्टूबर से सभी इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों अकॉस्टिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम (AVAS) अनिवार्य होगा। यह सिस्टम कम स्पीड पर गाड़ी से आवाज़ पैदा करेगा ताकि पैदल यात्रियों को वाहन का पता चल सके। रिपोर्ट के मुताबिक, यह नियम 0 से 20 kmph की स्पीड के दौरान लागू होने की बात कही गई है, क्योंकि इसी रेंज में EV की आवाज बहुत कम होती है और हादसों का रिस्क बढ़ता है।
AVAS क्या है और कैसे काम करता है?
AVAS (अकॉस्टिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम) एक ऐसा फीचर है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों में कम स्पीड पर कृत्रिम साउंड जनरेट करता है। इसे आप इस तरह से भी समझ सकते हैं कि EV जब धीमी रफ्तार में चल रही होती है और आसपास लोग मौजूद होते हैं, तो AVAS की वजह से गाड़ी से हल्की-सी इंजन जैसी आवाज आएगी, ताकि लोग सतर्क हो जाएं। यह साउंड आमतौर पर पार्किंग एरिया, रिवर्स लेते समय, ट्रैफिक सिग्नल के पास और भीड़भाड़ वाली गलियों में सबसे ज्यादा उपयोगी साबित होता है।
EV की खामोशी क्यों बन जाती है खतरा?
पेट्रोल-डीजल गाड़ियों में इंजन की आवाज़ और कंपन अपने आप एक संकेत बन जाता है कि गाड़ी पास है। लेकिन EV में इंजन जैसी तेज आवाज नहीं होती है। कम स्पीड पर टायर/रोड की आवाज भी कम होती है। लोग अक्सर मोबाइल या इयरफोन में होते हैं। इसकी वजह से बुजुर्गों और दृष्टिबाधित लोगों के लिए खतरा ज्यादा रहता है। इसी वजह से EV की साइलेंट नेचर कई बार अनचाहे हादसों का कारण बनती है।
क्या यह सिस्टम दोपहिया और तिपहिया वाहनों में भी आएगा?
इमेज में मौजूद रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ARAI ने संकेत दिया है कि टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर में भी AVAS जैसी जरूरत पर चर्चा हो रही है। यहां फोकस इस बात पर रहेगा कि आवाज़ जरूरी हो, लेकिन आसपास के माहौल में बेवजह शोर न बढ़ाए। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक स्कूटर और ई-रिक्शा के लिए भी ऐसे नियम बन सकते हैं, लेकिन फिलहाल मुख्य अपडेट चार पहिया EVs को लेकर है।
क्यों जरूरी है कि साउंड डिस्टर्बिंग न हो?
यह बात भी रिपोर्ट में साफ इशारा करती है कि सिस्टम ऐसा होना चाहिए जो पैदल यात्रियों को चेतावनी दे, लेकिन शहर में अनावश्यक ध्वनि प्रदूषण न बढ़ाए। क्योंकि अगर हर EV बहुत तेज आवाज करने लगे तो ट्रैफिक में शोर बढ़ेगा। रेजिडेंशियल एरिया में परेशानी होगी। EV का क्वाइट एंड कंफर्टेबल अनुभव भी खराब हो सकता है।
EV खरीदारों के लिए इसका मतलब क्या है?
अगर आप अक्टूबर के बाद EV खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो नई इलेक्ट्रिक कारों में AVAS फैक्ट्री फिटेड आएगा। पुराने EV मालिकों के लिए अभी स्पष्ट नहीं है कि रेट्रोफिट अनिवार्य होगा या नहीं। कार कंपनियों को अपने मॉडल्स में यह सिस्टम शामिल करना पड़ेगा। पैदल यात्रियों के लिए यह बदलाव सीधा सुरक्षा लाभ लेकर आएगा। |
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