साधारण बीमा के लिए कैसा हो बजट 2026-27
जैसे-जैसे भारत केंद्रीय बजट 2026-27 की ओर बढ़ रहा है, देश अपनी आर्थिक यात्रा के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। तीव्र औपचारिकीकरण, विस्तारित डिजिटल अवसंरचना, बढ़ती उपभोक्ता आकांक्षाएं और निरंतर सार्वजनिक निवेश— ये सभी इस बात को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं कि व्यक्ति और व्यवसाय जोखिम से कैसे जुड़ते हैं। ऐसे परिवेश में सामान्य बीमा अब कोई गौण वित्तीय उत्पाद नहीं रहा; यह आर्थिक स्थिरता, सामाजिक लचीलापन और दीर्घकालिक विकास का एक अनिवार्य स्तंभ बन चुका है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत के सामान्य बीमा क्षेत्र ने निरंतर वृद्धि दिखाई है, लेकिन मौजूदा आंकड़ों से कहीं बड़ा अवसर आगे मौजूद है। गैर-जीवन बीमा की पैठ अब भी जीडीपी के 1% के आसपास है। ऐसे में बजट में समावेशन को तेज करने, भरोसा गहराने और बीमा को भारत की विकास प्राथमिकताओं के साथ अधिक सुसंगत बनाने का अहम अवसर है।
स्वास्थ्य जागरूकता में वृद्धि, वाहन स्वामित्व का विस्तार, अवसंरचना विकास और नियामकीय सुधारों के चलते इस क्षेत्र की विकास-यात्रा उत्साहजनक रही है। अब अगला चरण केवल पैमाने पर नहीं, बल्कि प्रासंगिकता पर केंद्रित होना चाहिए— ताकि बीमा बढ़ती अनिश्चितताओं से परिवारों, उद्यमों और सार्वजनिक निवेशों की वास्तविक सुरक्षा कर सके। केंद्रीय बजट ऐसा वातावरण बनाकर उत्प्रेरक भूमिका निभा सकता है, जो अल्पकालिक व्यवधान के बजाय सतत विकास, दीर्घकालिक पूंजी निवेश और ग्राहक-केंद्रित नवाचार को प्रोत्साहित करे।
स्वास्थ्य बीमा भारत के साधारण बीमा बाजार की रीढ़ बनकर उभरा है और प्रीमियम में इसका बड़ा योगदान है। लेकिन बढ़ती चिकित्सा मुद्रास्फीति से व्यक्तियों और परिवारों की वहनीयता पर दबाव बना हुआ है। बजट 2026–27 से प्रमुख अपेक्षा यह है कि किफायती स्वास्थ्य कवरेज के विस्तार के लिए अधिक नीतिगत समर्थन मिले। स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी का युक्तिकरण, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों और कम रकम की पॉलिसियों के लिए, पहुँच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसके अतिरिक्त, वेलनेस कार्यक्रमों, दीर्घकालिक रोग प्रबंधन और प्रारंभिक निदान जैसे निवारक स्वास्थ्य उपायों को बढ़ावा देने वाले राजकोषीय प्रोत्साहन दीर्घकाल में दावों के दबाव को कम करने के साथ-साथ जन-स्वास्थ्य परिणामों में सुधार ला सकते हैं। स्वास्थ्य अवसंरचना, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और अस्पताल क्षमता को सुदृढ़ करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, जोखिम-निवारण उपकरण के रूप में स्वास्थ्य बीमा की प्रभावशीलता को और बढ़ाएगी।
भारत का गतिशीलता (मोबिलिटी) पारिस्थितिकी तंत्र इलेक्ट्रिक वाहनों, साझा परिवहन, कनेक्टेड तकनीकों और उन्नत सुरक्षा विशेषताओं के उदय के साथ तेज़ी से बदल रहा है। मोटर बीमा को भी इन परिवर्तनों के अनुरूप विकसित होना होगा। बजट लक्षित प्रोत्साहनों, स्पष्ट नियामकीय ढाँचों और डेटा-आधारित अंडरराइटिंग के समर्थन के माध्यम से सुरक्षित और स्वच्छ गतिशीलता को अपनाने में मदद कर सकता है। सड़क सुरक्षा अवसंरचना, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम और दुर्घटना-निवारण में निवेश न केवल जीवन बचाएगा, बल्कि नुकसान अनुपात घटाकर मोटर बीमा खंड की समग्र स्थिरता भी बढ़ाएगा।
अवसंरचना, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल परिसंपत्तियों में बड़े-पैमाने पर निवेश भारत की विकास रणनीति के केंद्र में हैं। इन क्षेत्रों के लिए इंजीनियरिंग, देयता, मरीन, साइबर और विशेष बीमा लाइनों सहित उन्नत जोखिम समाधान आवश्यक हैं। दीर्घकालिक परियोजना वित्तपोषण, जोखिम-साझेदारी तंत्र और सार्वजनिक अवसंरचना परियोजनाओं में बीमा की गहरी भागीदारी को बढ़ावा देने वाले बजटीय उपाय निवेशक के विश्वास को मजबूत करेंगे। घरेलू पुनर्बीमा क्षमता को प्रोत्साहित करना और आपदा जोखिम ढाँचों पर स्पष्टता प्रदान करना, बड़े और जटिल जोखिमों को देश के भीतर समाहित करने की भारत की क्षमता को भी सुदृढ़ करेगा।
भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने पहले ही वित्तीय सेवाओं में क्रांति ला दी है और बीमा इसका अगला बड़ा लाभार्थी बन सकता है। बीमा सुगम जैसे प्लेटफॉर्म ऑनबोर्डिंग को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और पूरी बीमा वैल्यू-चेन में प्रक्रियाओं के मानकीकरण की क्षमता रखते हैं।
बजट 2026–27 से अपेक्षा है कि ऐसी पहलों को निरंतर समर्थन मिले, साथ ही डेटा सुरक्षा, इंटरऑपरेबिलिटी और शिकायत निवारण प्रणालियों में निवेश किया जाए। डिजिटल रूप से सशक्त बीमा पारिस्थितिकी तंत्र ग्राहक विश्वास बनाने और पॉलिसी जारी करने व दावों के निपटान में घर्षण कम करने के लिए अत्यंत आवश्यक होगा।
राजकोषीय उपायों से आगे, नीतिगत स्थिरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बीमा एक दीर्घकालिक व्यवसाय है, जो पूर्वानुमेय नियमन, मजबूत शासन और सुसंगत पूंजी ढाँचों पर निर्भर करता है। स्थिर नियामकीय वातावरण बीमाकर्ताओं को प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और नवाचार में आत्मविश्वास के साथ निवेश करने में सक्षम बनाता है, साथ ही विवेकपूर्ण जोखिम प्रबंधन सुनिश्चित करता है। स्पष्ट संचार, तेज़ दावों का निपटान और सुदृढ़ शासन मानकों के माध्यम से उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करना—उद्योग और नीति-निर्माताओं दोनों की साझा प्राथमिकता बना रहना चाहिए।
भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाएँ बढ़ रही हैं और इसके साथ व्यक्तियों, व्यवसायों और संस्थानों के सामने जोखिमों का पैमाना और जटिलता भी बढ़ रही है। इन जोखिमों का प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से प्रबंधन करने के लिए एक परिपक्व और लचीला सामान्य बीमा क्षेत्र अनिवार्य है।
यदि केंद्रीय बजट 2026–27 वहनीयता, अवसंरचना समर्थन, डिजिटल सशक्तीकरण और नियामकीय स्थिरता पर केंद्रित रहता है, तो यह बीमा अपनाने और उसकी प्रासंगिकता को उल्लेखनीय रूप से तेज कर सकता है। परिणाम केवल उच्च पैठ वाले आँकड़ों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि भारत की विकास-गाथा के लिए आर्थिक अस्थिरता से एक मजबूत जोखिम-कवच तैयार होगा जो विश्वास, लचीलापन और दीर्घकालिक समृद्धि को सक्षम बनाएगा। |
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