जागरण संवाददाता, बस्ती। लखपति दीदी योजना के तहत जिले में 20 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी यह महिलाएं किसी न किसी रोजगार के जरिए अपने आपको आर्थिक रूप से मजबूत कर अपने परिवार का एक मजबूत सहारा बन चुकी हैं।
लखपति दीदी योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, जिससे उनकी सालाना एक लाख या उससे अधिक हो जाए। यह योजना महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आजीविका के अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर बना रही है।
जिले में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 52,867 महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है। इसके सापेक्ष अब तक की जो स्थिति है 20,124 महिलाएं लखपति दीदी के रूप में चयनित हो चुकी हैं। इनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक है। यह कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार समर्थन पाकर आत्मनिर्भर बनी हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन इनकी संख्या बढ़ाने के लिए समूहों के आय के स्रोत बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। जिला मिशन प्रबंधक मारतेन्दु बहादुर पाल ने बताया कि लक्ष्य के सापेक्ष महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लिए आजीविका मिशन लगातार प्रयत्नशील है।
लखपति दीदी बोलीं बढ़िया चल रही घर गृहस्थी
टीएचआर प्लांट से जुड़ी व लखपति दीदी के रूप में चयनित दुबौलिया विकास खंड के खुशहालगंज की रहने वाली मीना सिंह ने बताया कि प्लांट से जुड़ने के साथ ही उन्होंने एक पिकअप भी खरीदी है। ऐसे में अब वह आर्थिक समृद्धि की राह पर बढ़ चुकी हैं। हर माह होने वाली आय से वह अपने परिवार का भरण पोषण बेहतर ढंग से कर रही हैं। उनकी घर गृहस्थी बढ़िया चल रही है।
वहीं विशेषरगंज की रहने वाली वैष्णवी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी लखपति दीदी उमा यादव ने बताया कि वह स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मनरेगा से कराए जाने वाले कार्यों में लगने वाले सीआईबी बोर्ड बनाने का काम कर रही हैं। इससे उन्हें परिवार के भरण पोषण में काफी मदद मिल रही है। साथ ही जीवन स्तर भी बेहतर हो रहा है। |
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