तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य के सरकारी कोष से जुड़े 55 करोड़ रुपये के कथित पेंशन घोटाले में आरोपित बनाए गए बुजुर्ग पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने जांच में सहयोग करने की शर्त पर उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही मामले को विचारणीय मानते हुए अगली सुनवाई की तिथि 16 फरवरी तय की है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला की खंडपीठ ने पारित किया।मामले में चित्रकूट के वरिष्ठ कोषाधिकारी ने 17 अक्तूबर 2025 को कर्वी कोतवाली में 97 सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि कोषागार के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का अनियमित भुगतान किया गया।
आरोपित बनाए गए श्यामलाल, जयश्री मिश्रा, शिव आधार मौर्या, पुष्पेश शर्मा और रितेश त्रिपाठी सहित अन्य ने गिरफ्तारी पर रोक और एफआईआर रद करने की मांग को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं। दलील दी गई कि वे केवल पेंशनभोगी हैं और उनके खातों में आई धनराशि के पीछे कोई आपराधिक मंशा नहीं थी।
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राज्य सरकार ने इसे गंभीर वित्तीय अपराध बताते हुए याचिका का विरोध किया। कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया याचिकाकर्ताओं ने कोई जालसाजी नहीं की है और पुलिस को मामले के मुख्य साजिशकर्ता की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। |
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