पंजाब हरियाण हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक्स-सर्विसमैन कोटे से नियुक्त पंजाब पुलिस के डिप्टी सुपरिटेंडेंट आफ पुलिस (डीएसपी ) सुमीर सिंह को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में उन्होंने अपनी सीनियरिटी दोबारा तय करने और पदोन्नति से वंचित किए जाने को चुनौती दी थी।
जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि सुमीर सिंह की नियुक्ति एक “विशेष मामला” थी और वह अब अपनी नियुक्ति शर्तों से अलग जाकर अतिरिक्त लाभ नहीं मांग सकते। सुमीर सिंह ने हाईकोर्ट में यह मांग रखी थी कि उनकी सीनियरिटी तय करते समय उनके द्वारा मिलिट्री सेवा और एक्साइज एंड टैक्सेशन आफिसर के रूप में दी गई सेवा को भी जोड़ा जाए।
उन्होंने 20 मई 2025 को जारी उस आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसके तहत उनसे जूनियर डीएसपी अधिकारियों को एसपी पद पर पदोन्नत कर दिया गया था। मामले की पृष्ठभूमि काफी जटिल रही है।
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2015 में जारी हुआ था विज्ञापन
वर्ष 2015 में पंजाब लोक सेवा आयोग ने डीएसपी और ईटीओ सहित कई पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। सुमीर सिंह, जिन्होंने सेना में सेवा दी थी, एक्स-सर्विसमैन कोटे से चयनित हुए, लेकिन निर्धारित लंबाई से एक इंच कम होने के कारण उन्हें डीएसपी पद नहीं दिया गया।
उन्होंने इस आधार पर हाई कोर्ट का रुख किया कि सैन्य सेवा के कारण उन्हें लंबाई में छूट मिलनी चाहिए। 13 जुलाई 2016 को हाईकोर्ट ने उनकी अर्जी पर सरकार को निर्णय लेने का निर्देश दिया और बाद में 6 जुलाई 2017 को राज्य सरकार ने उन्हें एक इंच की छूट भी दे दी। हालांकि, यह छूट अन्य चयनित एक्स-सर्विसमैन डीएसपी उम्मीदवारों द्वारा चुनौती दे दी गई और राज्य सरकार ने बाद में यह छूट वापस ले ली।
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2018 में ईटीओ के रूप में पदभार संभाला
इसी बीच सुमीर सिंह ने 25 मई 2018 को विरोध स्वरूप ईटीओ के रूप में कार्यभार संभाल लिया। बाद में मंत्रिपरिषद के 9 जनवरी 2020 के निर्णय के आधार पर सरकार ने उन्हें 24 जनवरी 2020 को डीएसपी नियुक्त कर दिया, जिसे “विशेष मामला” बताया गया और एक डीएसपी पद पंजाब लोक सेवा आयोग के दायरे से बाहर निकाल कर उन्हें दिया गया। उनकी ईटीओ पद से इस्तीफा 27 जनवरी 2020 को स्वीकार कर लिया गया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुमीर सिंह की यह नियुक्ति नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि विशेष रूप से की गई थी और उनके नियुक्ति पत्र में साफ-साफ उल्लेख था कि उनकी सीनियरिटी पंजाब सिविल सर्विसेज (जनरल एंड कामन कंडीशंस आफ सर्विस) नियम, 1994 के अनुसार तय होगी।
अदालत ने यह भी कहा कि नियुक्ति पत्र में कहीं भी यह नहीं लिखा गया कि उनकी सेना या ईटीओ के रूप में की गई सेवा को डीएसपी सीनियरिटी में जोड़ा जाएगा। ऐसे में अब इस स्तर पर ऐसा आदेश देना नियुक्ति पत्र को दोबारा लिखने जैसा होगा, जो कानूनन संभव नहीं है।कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि नियुक्ति वर्ष 2020 में हुई थी और करीब छह साल बाद सीनियरिटी को चुनौती देना विलंब से ग्रस्त है, इसलिए भी इसमें हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता। अंतत अदालत ने याचिका को “मेरिट से रहित” करार देते हुए खारिज कर दिया।
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