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फास्टैग और अमेजन गिफ्ट कार्ड से ठगी का नया खेल, अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट बेनकाब; 70 मोबाइल और 10 लैपटॉप बरामद

deltin33 1 hour(s) ago views 812
  

ठगी की रकम को छिपाने के लिए फास्टैग और अमेजन गिफ्ट कार्ड का सहारा लेते थे। प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। पश्चिम दिल्ली की साइबर थाना पुलिस ने एक बेहद शातिर और आधुनिक तरीके से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने ठगी की रकम को छिपाने के लिए फास्टैग और अमेजन गिफ्ट कार्ड का सहारा लेकर एक नया काम करने का तरीका विकसित किया था। पुलिस ने इस मामले में राजस्थान के श्रीगंगानगर से दो मुख्य आरोपित को गिरफ्तार किया है।
फाइल खोलते ही फोन हो गया हैक

डीसीपी डी शरद भास्कर ने बताया कि इस गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब दिल्ली के एक निवासी ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके वाट्सएप पर ई-चालान का एक मैसेज आया था। उस मैसेज में एक एपीके फाइल थी। जैसे ही शिकायतकर्ता ने फाइल खोली, उसका फोन हैक हो गया और उसके क्रेडिट कार्ड से 1 लाख रुपये से अधिक की राशि कट गई। मामला एक लाख से ऊपर होने के कारण तुरंत ई-एफआईआर दर्जकर जांच साइबर थाना पश्चिम जिले को सौंपी गई।
ठगी की रकम से अमेजन गिफ्ट कार्ड खरीदे

जांच के दौरान इंस्पेक्टर विकास कुमार और एसीपी विजय सिंह की देखरेख में गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण किया। पुलिस पाया कि ठगी गई रकम को पहले आईडीएफसी बैंक के एक पूल अकाउंट में भेजा गया, जो कई फास्टैग से जुड़ा था। इसके बाद, उस फास्टैग बैलेंस का उपयोग करके अमेजन गिफ्ट कार्ड खरीदे गए, ताकि पुलिस के लिए रुपयों का पीछा करना मुश्किल हो जाए।
साइबर फ्राॅड का पूरा सेटअप बरामद

डिजिटल साक्ष्यों का पीछा करते हुए दिल्ली पुलिस की टीम राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित घड़साना पहुंची। वहां बंसारी कंपनी के नाम से चल रहे एक दफ्तर पर छापेमारी की गई, जहां से पूरा साइबर फ्राॅड का सेटअप बरामद हुआ। गिरफ्तार आरोपित की पहचान घनश्याम उर्फ जीबी बॉस और उसके सहयोगी नरेश कुमार उर्फ कालू के रूप में हुई। घनश्याम बीएससी और एमबीए डिग्री धारक है। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 70 मोबाइल फोन, 10 लैपटॉप, फर्जी आईडी पर लिए गए 467 सिम कार्ड, 37 एटीएम कार्ड, 10 बैंक पासबुक, 5 फास्टैग और 1 पीओएस मशीन बरामद की है।
नेटवर्क खंगालकर और की जाएगी गिरफ्तारी

आरोपित घनश्याम ने पूछताछ में बताया कि उसने पहले बिल भुगतान की फर्म शुरू की थी, लेकिन कम मुनाफे के कारण उसने ठगी का रास्ता चुना। वह ठगी की रकम को अपने व्यापारिक खातों में मंगवाता था और उसे फास्टैग के जरिए सफेद करता था। एनसीआरपी पोर्टल की जांच से पता चला है कि इनके बैंक खातों से देश के कई अन्य राज्यों की ठगी के मामले भी जुड़े हुए हैं। डीसीपी ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य नेटवर्क और पीड़ितों का पता लगाया जा सके।

यह भी पढ़ें- फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग से 300 करोड़ की ठगी, कोलकाता-लखनऊ से चार जालसाज गिरफ्तार; बिना पूछे चुराते थे ओटीपी
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