महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार ने विश्वविद्यालय में पीजी पाठ्यक्रमों के लिए 20 सीटों को मान्यता प्रदान की है। इन सीटों पर आवंटित छात्र-छात्राओं ने अपनी काउंसलिंग पूरी कर पढ़ाई शुरू कर दी है।
पहले दिन छात्रों को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. के. रामचंद्र रेड्डी ने कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं, जिन्होंने विश्वविद्यालय में पहली बार पीजी की पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया है। उन्होंने स्लाइड प्रस्तुति के माध्यम से विश्वविद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी।

कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय की अपनी फार्मेसी में गुणवत्तापूर्ण औषधियों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही, यहां की पैथोलॉजी में रोगियों के रक्त आदि की जांच न्यूनतम दरों पर की जा रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आने वाले समय में अल्ट्रासाउंड सहित अन्य चिकित्सा सुविधाएं भी जल्द शुरू की जाएंगी।
डॉ. रेड्डी ने यह भी बताया कि बीएएमएस की पढ़ाई के बाद पीजी में प्रवेश लेने वाले छात्र रोगियों का इलाज भी कर सकेंगे। दोपहर 2 बजे तक छात्र ओपीडी में चिकित्सकों के साथ चिकित्सीय जानकारी प्राप्त करेंगे, जबकि दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। पीजी की कक्षाओं में आयुर्वेद के पांच विषयों में चार-चार छात्र शामिल हैं। इन विषयों में द्रव्य गुण, क्रिया शरीर, रचना शरीर, रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना, और संहिता एवं सिद्धांत शामिल हैं।
कुलपति ने बालक छात्रावास के वार्डन की जिम्मेदारी डॉ. रमाकांत द्विवेदी और गर्ल्स छात्रावास की वार्डन की जिम्मेदारी डॉ. लक्ष्मी अग्निहोत्री को सौंपने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि छात्रावास में फर्नीचर की व्यवस्था पूरी होने तक सभी 20 छात्र-छात्राएं गेस्ट हाउस में रहेंगे। कुलपति ने छात्रों को आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय उनके लिए एक परिवार की तरह है और किसी भी परेशानी की स्थिति में वे उनसे तुरंत संपर्क कर सकते हैं।
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