नई दिल्ली: देश में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि करीब 70% भारतीय आबादी में एक खास विटामिन की गंभीर कमी पाई गई है। आमतौर पर लोग इसे अनदेखा कर देते हैं, लेकिन इसकी कमी लंबे समय में कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। अगर आपके शरीर में ये लक्षण दिखाई दें, तो इसे हल्के में न लें—शुरुआती चेतावनी को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। आइए जानते हैं कौन सा विटामिन है और इसकी कमी से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है।
बात कर रहे हैं विटामिन-डी की, जिसे 'सनशाइन विटामिन' भी कहा जाता है। विडंबना देखिए कि जो पोषण हर सुबह सीधे हमारे घर के आंगन और बालकनी में आता है, आधुनिक जीवनशैली की बंद दीवारों ने हमें उसी से दूर कर दिया है। आज के दौर में यह केवल हड्डियों की मजबूती का मामला नहीं रह गया है, बल्कि विटामिन-डी की कमी हमारे दिल और मानसिक सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभर रही है।
इन गंभीर बीमारियों का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन-डी शरीर के लिए एक 'मास्टर चाबी' की तरह काम करता है। यह शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस को सोखने में मदद करता है, जिससे न केवल हड्डियां फौलाद जैसी बनती हैं, बल्कि हमारा इम्यून सिस्टम भी बाहरी बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार रहता है। जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो इसका असर केवल थकान या बदन दर्द तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और दिल की गंभीर बीमारियों का रास्ता खोल देता है।
भारत में इस संकट के पीछे कई बड़े कारण हैं। हमारी भागदौड़ भरी जिंदगी ने हमें धूप से दूर कर दिया है। शहरों में बढ़ता प्रदूषण सूरज की उन अल्ट्रावायलेट किरणों को रोक देता है जो त्वचा में विटामिन-D बनाने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा, बढ़ती उम्र के साथ शरीर की इस विटामिन को बनाने की प्राकृतिक क्षमता भी कम होने लगती है। लोग घंटों ऑफिस या बंद कमरों में बिता रहे हैं, जिसके कारण प्राकृतिक रूप से शरीर को मिलने वाली ऊर्जा का स्रोत कट गया है।
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