
Study in USA: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में स्टूडेंट वीजा को लेकर लगातार कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। छात्रों के वीजा रद्द कर उन्हें डिपोर्ट भी किया गया है। इसका असर अब दिखने भी लगा है, क्योंकि भारतीय छात्र अब यहां पढ़ने जाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ट्रंप की तिकड़मबाजी का आलम ये है कि दो हफ्तों के भीतर फॉल सेमेस्टर की शुरुआत होनी है और अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में पढ़ने जाने वाले भारतीयों की संख्या में गिरावट की आशंकी जताई जा रही है।टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, हैदराबाद में एजुकेशन कंसल्टेंट में बताया कि वीजा अपॉइंटमेंट स्लॉट में कमी और वीजा आवेदन के रिजेक्ट होने की दर में इजाफे की वजह से यूएस जाने वाले छात्रों की संख्या में 70% तक की गिरावट आ सकती है। छात्रों को वीजा इंटरव्यू के लिए स्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग वीजा देने से पहले छात्रों की सोशल मीडिया एक्टिविटी चेक कर रहा है। इस वजह से बहुत से छात्रों का वीजा आवेदन रिजेक्ट भी कर दिया जा रहा है। हैदराबाद ओवरसीज कंसल्टेंट के संजीव राय ने कहा, "इस समय तक आमतौर पर ज्यादातर छात्र अपने वीजा इंटरव्यू को पूरा कर लेते हैं और उड़ान भरने की तैयारी करते हैं। इस साल हम हम अभी भी हर दिन पोर्टल को यह उम्मीद करते हुए रिफ्रेश कर रहे हैं कि कोई स्लॉट खुलेगा। ये पिछले कुछ सालों में सबसे खराब है।" अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था कि स्टूडेंट वीजा के लिए इंटरव्यू अप्वाइंटमेंट अलग-अलग फेज में खुलेंगे, ताकि हर किसी को बुकिंग का मौका मिले।हालांकि, एजुकेशन कंसल्टेंट्स का कहना है कि ये पूरी प्रक्रिया असंगत और पारदर्शिता की कमी वाली है। कई छात्रों को इंटरव्यू स्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं और बुकिंग के बाद कंफर्मेशन नहीं मिल रहा है। इस वजह से उन्हें अपना एडमिशन वापस लेना पड़ रहा है। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कई सारे छात्र तो जर्मनी जैसे देशों में भी जा रहे हैं, जहां उन्हें बिना झंझट वीजा मिल रहा है। ट्रंप के फैसलों की वजह से इस साल अमेरिकी कॉलेजों से भारतीय छात्र गायब ही हो जाएंगे। |