Indian Army Vijay Diwas at Home: भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत की याद में 'विजय दिवस एट होम’ कार्यक्रम का आयोजन किया. यह समारोह नई दिल्ली स्थित आर्मी हाउस में रखा गया. इस दौरान भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल रहे. कार्यक्रम में भारतीय सेना की स्वदेशी तकनीकों और नई क्षमताओं की झलक देखने को मिली. जो सेना के आधुनिक और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ते कदम को दिखाती है.
आधुनिक तकनीकों और उपकरणों को प्रदर्शन
कार्यक्रम में आधुनिक तकनीकों और उपकरणों को प्रदर्शित किया गया. इसमें दिखा कि भारतीय सैनिक, इंजीनियर, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थान मिलकर ऐसी तकनीकें विकसित कर रहे हैं. जो न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती हैं बल्कि आपदा प्रबंधन, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार हैं. इस मौके पर 73 देशों के राजदूत और हाई कमिश्नर, वीरता पुरस्कार विजेता, खिलाड़ी, अलग-अलग क्षेत्रों के विशिष्ट अतिथि और देश के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. इससे भारत की बढ़ती वैश्विक रक्षा भूमिका और स्वदेशी सैन्य तकनीकों पर अंतरराष्ट्रीय भरोसा भी नजर आया.
सैटेलाइट इमेज एनालिसिस सिस्टम दिखाया
कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैटेलाइट इमेज एनालिसिस सिस्टम को खास तौर पर दिखाया गया. सैटेलाइट तस्वीरों को तेजी से समझने और उनमें बदलाव पहचानने में मदद करता है. यह तकनीक सेना के साथ-साथ आपदा निगरानी करता है. वहीं खेती और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग में भी काम आ सकती है. इसके अलावा एक पोर्टेबल ‘AI-इन-ए-बॉक्स’ सिस्टम भी दिखाया गया. यह बिना इंटरनेट के दूर-दराज इलाकों में काम कर सकता है. मुश्किल हालात में फैसले लेने में मदद देता है.
ड्रोन एनालिसिस टूल
सेना ने ‘एकम AI’ नाम का पूरी तरह स्वदेशी और सुरक्षित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म भी पेश किया. यह संवेदनशील डाटा को सुरक्षित रखते हुए निर्णय लेने में सहायता करता है. इसके साथ ही ड्रोन एनालिसिस टूल दिखाया गया. इससे पकड़े गए ड्रोन की जानकारी निकालकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी की जा सकती है.
मोबाइल कनेक्टिविटी सिस्टम भी प्रदर्शित
दूरस्थ इलाकों में संचार के लिए ‘प्रोजेक्ट संभव’ के तहत सैटेलाइट आधारित मोबाइल कनेक्टिविटी सिस्टम भी प्रदर्शित किया गया. वहीं तेजी से संपर्क बहाल करने के लिए स्वदेशी एडवांस ट्रस ब्रिज दिखाया गया. इसे कम समय और कम संसाधनों में तैयार किया जा सकता है. यह पुल बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं में भी बेहद उपयोगी साबित हो सकता है.
कार्यक्रम में कठिन पहाड़ी इलाकों के लिए तैयार स्वदेशी ऑल-टेरेन वाहन भी दिखाया गया. यह संकरे और ऊंचाई वाले रास्तों पर सामान ढोने और घायलों को निकालने में मदद करता है. पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक कचरे से बने ट्रैकवे सिस्टम भी पेश किए गए. जो कच्चे रास्तों पर वाहनों की आवाजाही आसान बनाते हैं.

खतरनाक परिस्थितियों के लिए तैयार
सेना ने एक साइलेंट इलेक्ट्रिक टैक्टिकल वाहन भी प्रदर्शित किया. यह कम शोर और कम गर्मी के साथ काम करता है. इसके अलावा नाइट विजन उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले एक अहम पुर्जे भी शामिल हैं. स्वदेशी तौर पर तैयार करने की सफलता भी दिखाई गई. इससे खर्च और समय दोनों की बचत होगी. आग लगने जैसी खतरनाक परिस्थितियों के लिए तैयार है. वहीं फायरफाइटिंग रोबोट जल्दी बनने वाले प्री-फैब्रिकेटेड शेल्टर, हरित ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं. लद्दाख में ग्रीन हाइड्रोजन पावर प्रोजेक्ट भी इस प्रदर्शनी का हिस्सा रहे.
भारतीय सेना ने इस मौके पर आपदा राहत में अपनी भूमिका को भी दोहराया. बीते एक साल में सेना ने हजारों लोगों को बचाया है. टूटा हुआ ढांचा बहाल किया है. देश-विदेश में राहत सामग्री पहुंचाई है. विजय दिवस एट होम कार्यक्रम में दिखाए गए.
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