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बेलडांगा हिंसा: पुलिस एस्कॉर्ट की कमी से नहीं हो सकी आरोपियों की पेशी

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पुलिस एस्कॉर्ट की कमी से नहीं हो सकी आरोपियों की पेशी



राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता: मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई \“संगठित हिंसा\“ मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) को गुरुवार को एक बार फिर प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पर्याप्त पुलिस एस्कार्ट न मिलने के कारण एजेंसी लगातार दूसरी बार 36 गिरफ्तार आरोपितों को कोलकाता के विचार भवन स्थित विशेष एनआइए अदालत में भौतिक रूप से पेश करने में विफल रही। हालांकि, अदालत ने एनआइए की अर्जी को स्वीकार करते हुए 31 आरोपितों की जेल हिरासत 19 फरवरी तक बढ़ा दी है।
परीक्षाओं का हवाला देकर पुलिस ने नहीं मुहैया कराई सुरक्षा

सूत्रों के अनुसार, एनआइए ने आरोपितों की पेशी के लिए मुर्शिदाबाद जिला पुलिस से सुरक्षा एस्कार्ट का औपचारिक अनुरोध किया था। लेकिन पुलिस प्रशासन ने उच्च माध्यमिक परीक्षा का हवाला देते हुए पर्याप्त बल उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई।

पुलिस का तर्क था कि परीक्षाओं के कारण बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात हैं। इससे पहले पांच फरवरी को भी सुरक्षा कारणों से ही आरोपितों को कोर्ट नहीं लाया जा सका था। नतीजतन, गुरुवार को 31 आरोपितों की उपस्थिति वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दर्ज की गई, जबकि पांच अन्य आरोपित नाबालिग होने के कारण इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बने।

सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद एनआइए की जांच हुई तेज


झारखंड में मुर्शिदाबाद के एक प्रवासी श्रमिक अलाउद्दीन शेख की संदिग्ध मौत के बाद जनवरी में बेलडांगा में हिंसा भड़क उठी थी। इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद गृह मंत्रालय ने जांच एनआइए को सौंपी थी। राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 11 फरवरी को शीर्ष अदालत ने हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने एनआइए को निर्देश दिया है कि वह अपनी स्थिति रिपोर्ट कलकत्ता हाई कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश करे और स्पष्ट करे कि क्या आरोपितों पर यूएपीए की धारा 15 के तहत मामला बनता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अगली सुनवाई 17 को

अदालत में राज्य सरकार के वकील ने एनआइए की सक्रियता को आगामी विधानसभा चुनाव से प्रेरित बताते हुए सवाल उठाए। वहीं, एनआइए ने दलील दी कि अभी कई महत्वपूर्ण दस्तावेज राज्य पुलिस से प्राप्त होने बाकी हैं, इसलिए आरोपितों को हिरासत में रखना अनिवार्य है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को तय की है।

ज्ञात हो कि झारखंड पुलिस ने श्रमिक की मौत को आत्महत्या करार दिया था, जबकि बेलडांगा में अफवाहों के बाद हुई सुनियोजित हिंसा में राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल सेवाएं बुरी तरह बाधित हुई थीं।
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