शुक्रवार को एक और आरोपित रईस अहमद अंसारी की जमानत मंजूर कर ली। Concept Photo
जागरण संवाददाता, नैनीताल। हल्द्वानी के बनभूलपुरा कांड मामले के हाईकोर्ट से अब तक 86 आरोपितों को जमानत मिल चुकी है जबकि मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक को अब तक जमानत नहीं मिली। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने शुक्रवार को एक और आरोपित रईस अहमद अंसारी की जमानत मंजूर कर ली।
तीन दिन पहले अभियुक्त मोकिन सैफी जीया उर रहमान व रईस अहमद की जमानत की थी। मुख्य आरोपित को कोई जमानत न देते हुए अगली सुनवाई 17 फरवरी की तिथि नियत की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास गुगलानी व सीके शर्मा ने कोर्ट को अवगत कराया कि मोकिन सैफी व अन्य का नाम न तो प्राथमिकी में है न ही वह घटना में शामिल हैं।
संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया गया, उन्हें जमानत पर रिहा किया जाय। अन्य की तरफ से कहा गया की जिस दिन घटना हुई मौके पर मोजूद नहीं थे। पड़ोस में रहने के खातिर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया । घटना के समय वे वहां नही थे। उनको बेवजह इस मामले में फंसाया जा रहा है। इसलिए उन्हें प्राथमिकता की तौर पर रिहा किया जाय।
अब्दुल मलिक पर चार मुकदमे दर्ज
अब्दुल मलिक सहित अन्य के विरुद्ध बनभूलपुरा दंगे के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें से एक मामला यह भी था कि मलिक ने कूटरचित ,झूठे शपथपत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया।
नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण करके उसे बेचा गया, जब जिला व पुलिस प्रशासन की टीम इस अवैध अतिक्रमण को हटाने पहुंची तो पथराव किया गया। बाद में इसने दंगा का रूप ले लिया। इसी दंगे में पांच की मौत हुई, सरकारी, पुलिस व अन्य लोग घायल हो गए कईयों की जान तक चली गयी। आरोपितों का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नहीं है। पुलिस ने जबरन इस मामले में फंसाया है, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाय।
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