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उत्तराखंड में मत्स्य पालन को बढ़ावा: डेनमार्क से अंडे, 100 टन ट्राउट निर्यात

cy520520 8 hour(s) ago views 137
  

-विभिन्न झीलों में संरक्षण एवं संवर्द्धन कार्य होंगे, एक्वा टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा. File



राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड राज्य मत्स्य पालक विकास अभिकरण की प्रबंध समिति की 22वीं बैठक सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में हुई। बैठक में मत्स्य क्षेत्र के विस्तार, निर्यात संवर्धन और किसानों की आय बढ़ाने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में निर्माणाधीन राज्य स्तरीय इंटीग्रेटेड एक्वापार्क में निर्यात उन्मुख प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने तथा तिलैपिया एवं पंगेशियस हैचरी के बेहतर संचालन के लिए भारत सरकार की प्रतिष्ठित संस्थाओं से परामर्श सेवाएं लेने का निर्णय लिया गया। राज्य के ट्राउट मत्स्य पालकों को समय पर मत्स्य बीज उपलब्ध कराने के लिए डेनमार्क से 25 लाख ट्राउट ओवा (अंडे) आयात करने पर भी सहमति बनी।

इसके अतिरिक्त राज्य की विभिन्न झीलों में संरक्षण एवं संवर्द्धन कार्यों तथा एक्वा टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केज कल्चर गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर विचार किया गया। इसके लिए संबंधित विभागों और संस्थाओं से आवश्यक सहमति प्राप्त की जाएगी।

जनपद हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को आर्नामेंटल फिशरीज हब के रूप में विकसित करने का भी निर्णय लिया गया, जिससे सजावटी मछली पालन के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे। बैठक में बताया गया कि पिछले चार वर्षों में मत्स्य विभाग के बजट में औसतन प्रतिवर्ष 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नवीन स्वीकृत ट्राउट प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से राज्य में मात्स्यिकी क्षेत्र तेजी से उभर रहा है और यह राज्य का तीसरा सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला सेक्टर बन रहा है। मंत्री ने किसानों की आय में वृद्धि के लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।

साथ ही मत्स्य पालकों द्वारा उत्पादित मछलियों के विपणन के लिए निर्यात रोडमैप को अनुमोदित करते हुए आवश्यक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया शुरू करने तथा प्रथम चरण में 100 टन ट्राउट मछली के निर्यात पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए। इस संबंध में केन्द्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान और मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय, पंतनगर के सहयोग से तकनीकी मार्गदर्शन लेने की बात कही गई। बैठक में अभिकरण के उपाध्यक्ष उत्तम दत्ता, डा. बीवीआरसी. पुरुषोत्तम, चन्द्र सिंह धर्मशक्त, खजान चंद्र पांडेय, अनिल कुमार, डा. अवधेश कुमार, शरद श्रीवास्तव, उपस्थित रहे।
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