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शेयर बाजार धोखाधड़ी: 61.72 लाख रुपये ठगने वाला सिंडिकेट सदस्य गोवा से गिरफ्तार

LHC0088 1 hour(s) ago views 826
  

शेयर बाजार में उच्च रिटर्न का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट के सदस्य को गोवा से गिरफ्तार किया गया।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजस्थान के रहने वाले एक व्यक्ति को उच्च रिटर्न दिलाने का झांसा देकर उनसे शेयर बाजार में 61.72 लाख रुपये निवेश करवा धोखाधड़ी करने में शामिल एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट के सदस्य रोनक जगदीश भाई ठक्कर को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है।

2024 में इस सिंडिकेट के खिलाफ क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज किया था। केस दर्ज करने के बाद क्राइम ब्रांच ने कई सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था। लगातार टेक्निकल सर्विलांस और गोवा पुलिस के साथ बेहतर ताल मेल बना पुलिस ने उसे गोवा के मोपा एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया। वह पहले दुबई से काम कर रहा था।

डीसीपी आदित्य गौतम के मुताबिक रौनक जगदीश भाई ठक्कर, गांधीधाम, गुजरात का रहने वाला है और लंबे समय से फरार था। वह विदेश से काम करता था। इससे पूछताछ में संगठित आपराधिक सिंडिकेट का पता चला है जिसमें शेल फर्म, म्यूल अकाउंट, नकली एमएसएमई दस्तावेज, नकली रबर स्टाम्प और सिमकार्ड शामिल थे, जिनका इस्तेमाल असली फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन की नकल करने के लिए किया जाता था।

इसमें मनी ट्रेल का पता चला है। मुख्य रिसीवर के खाते शेल एंटिटी मेसर्स महादेव एंटरप्राइजेज (जूनागढ़, गुजरात) और मेसर्स न्यू सदीकीन (श्रीनगर, कश्मीर) से जुड़ा हुआ पाया गया। इसके बाद कई म्यूल खातों में तेजी से लेयरिंग की गई थी। इस सिंडिकेट के 17 सदस्यों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। उनके कब्जे से 81 सिमकार्ड, 24 स्मार्ट फोन, नकली रबर स्टैम्प, चेक बुक, सीपीयू और अन्य सामान बरामद किया गया।

राजस्थान के हनुमानगढ़ के रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत कर बताया था कि उनसे मैसर्स ग्लोब कैपिटल मार्केट का प्रतिनिधि बनकर 61,72,000 ठगी कर ली गई। इसका रजिस्टर्ड आफिस कनाट प्लेस में है। बात करने के बाद साइबर अपराधियों ने शिकायतकर्ता को ग्लोब कैपिटल स्टाक ग्रुप नाम के वाट्सएप ग्रुप में जोड़ कर उन्हें निवेश करने के लिए उकसाया गया और उनसे धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों के बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई गई।

शिकायतकर्ता को पैसे की जरूरत होने पर जब वह पैसा नहीं निकाल पाया तब पूछताछ में उसे मोबाइल एप्लीकेशन नकली होने का पता चला तब उन्होंने क्राइम ब्रांच में केस दर्ज करवा दिया था। जांच में पता चला कि ठगी की रकम मुख्य रूप से दो बैंक खातों में ट्रांसफर की गई, जिनमें एक मेसर्स महादेव एंटरप्राइजेज (जूनागढ़, गुजरात) और दूसरा मेसर्स न्यू सदीकीन (श्रीनगर, कश्मीर) शामिल थी। उसके बाद, पैसे तेजी से निकालकर और दूसरे म्यूल खातों मेसर्स आलिव एंटरप्राइजेज (मलाड, मुंबई) व राजू भाई सोनू भाई (सूरत, गुजरात) में डाल दिए गए।

सिमकार्ड का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया गया था, जिनमें ज्यादातर अहमदाबाद, गुजरात से एक ही वेंडर दीपक वाधवानी ने जारी किए थे। इसे देखते हुए क्राइम ब्रांच की तीन टीमों ने एसीपी रमेश चंदर लांबा व इंस्पेक्टर पंकज मलिक और रोहित कुमार की टीम ने मुंबई, सूरत और अहमदाबाद में छापेमारी की। इस केस में कई राज्यों में फैला बहुत ही टेक्निकल और लेयर्ड फाइनेंशियल ट्रेल शामिल था। लगातार कोशिशों से, टीम ने एक स्ट्रक्चर्ड सिंडिकेट का पता लगाया जिसमें म्यूल अकाउंट आपरेटर, सिम सप्लायर, बिचौलिए और विदेश से काम करने वाले मास्टरमाइंड शामिल थे।

टीम ने लगातार ग्राउंड वर्क व टेक्निकल जांच कर मनी ट्रांसफर की हर चेन को जोड़ने और मुख्य आरोपित की पहचान करने में अहम भूमिका निभाई। पहले इस मामले में शैलेश सुभाष गुप्ता, मेसर्स आलिव एंटरप्राइजेज, मलाड, मुंबई का अकाउंट होल्डर, राजू भाई सोना भाई प्रजापति, सूरत, गुजरात का बैंक अकाउंट होल्डर व दीपक वाधवानी, अहमदाबाद, गुजरात के वेंडर को पकड़ा गया। उनसे पूछताछ के बाद कई अन्य को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार कर लिया गया।

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