search

300 साल से ज्यादा पुराना रंग बदलने वाला शिवलिंग, जहां महाशिवरात्रि पर चढ़ाई जाती हैं हजारों कांवड़

deltin33 3 hour(s) ago views 518
  

तीन सौ साल से अधिक पुरानी आस्था का प्रतीक है रामबाग का पौराणिक शिवलिंग. Jagran



जागरण संवाददाता, दिनेशपुर। गांव रामबाग में बना शिवलिंग तीन सौ साल से भी अधिक समय से आस्था का केंद्र रहा है। जिसमें महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस प्राचीन शिवलिंग पर हजारों की संख्या में कांवड़ चढ़ाई जाती हैं। पौराणिक शिवलिंग आदिवासी बुक्सा जनजाति के लोगों में विशेष महत्व रखता है। इसी के साथ बड़ी संख्या में बंगाली, देशी,पंजाबी सहित अन्य जातियों के लोग भी आस्था रखते है।

मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रत्येक वर्ष विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार भी शिवरात्रि से पूर्व ही सभी तैयारियां जोरों पर हैं। शिव में आस्था रखने वाले हरिद्वार से गंगा जल लेकर रामबाग पहुंचने लगे हैं | दिनेशपुर के गदरपुर मार्ग स्थित रामबाग गांव में तीन सौ साल से भी अधिक पौराणिक शिवलिंग मौजूद है। महाशिवरात्रि के अवसर पर इस गांव और मंदिर परिसर में पांच दिवसीय विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व है। जिसको लेकर मंदिर परिसर में इन दिनों तैयारियां जोरों पर हैं।

इस पौराणिक शिवलिंग के बारे में वर्तमान पुजारी चंदू सिंह ने बताया उनके परदादा केदारनाथ सिंह की कोई संतान नही थी जिस कारण वह दुखी थे और अपनी मन्नत को लेकर वह कैलाश पर्वत पर चले गए। उन्होंने कैलाश पर्वत पर ही शिवजी की आराधना की। जिसके उपरांत रात्रि विश्राम के दौरान उनके सपने में शिवजी प्रकट हुए और उन्होंने कहा रामबाग में एक टीला है।

इस टीले के नीचे उनका शिवलिंग विराजमान है, जिसे निकालकर मंदिर का निर्माण किया जाए। जिसके उपरांत केदारनाथ यहां बीहड़ में पहुंचे और खुदाई की, इस दौरान उन्हें शिवलिंग मिला। उन्होंने इस जगह मंदिर बना दिया। उसके बाद उनके घर दो संतान ने जन्म लिया। यहीं से बुक्सा जनजाति का आस्था का केंद्र बन गया रामबाग का शिवलिंग । महाशिवरात्रि पर यहां हजारों की संख्या में कावड़ चढ़ाई जाती हैं। इस साल भी महाशिवरात्रि पर विशाल मेले का आयोजन होना है। जिसके तहत मंदिर परिसर में सभी तैयारियां कर ली गईं हैं ।

मान्यता है इस पौराणिक शिवलिंग पर जो भी व्यक्ति सच्ची श्रद्धा से गंगा जल से अभिषेक करता है उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। यही कारण है इस शिवलिंग पर प्रत्येक वर्ष कावड़ियों की संख्या बढ़ती जा रही है ।
कई बार रंग बदलता है शिवलिंग

पौराणिक शिवलिंग के बारे में वर्तमान पुजारी चंदू सिंह बताते हैं शिवलिंग वर्ष में कई बार अपना रंग बदलता है। यही नही वह बताते हैं शिवलिंग का आकार भी छोटा बड़ा होता रहता है।

यह भी पढ़ें- हरिद्वार में महाशिवरात्रि की धूम: मध्यरात्रि में हुई महाआरती, हरकी पैड़ी पर भक्तों की भीड़

यह भी पढ़ें- महाशिवरात्रि पर सीएम धामी ने खटीमा में किया जलाभिषेक, मेले का किया शुभारंभ
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
471429