डाटा संरक्षण कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस फाइल फोटो)
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 के कई प्रविधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है।
हालांकि, शीर्ष न्यायालय ने विवादित प्रविधानों पर अंतरिम रोक लगाने से इन्कार कर दिया और कहा कि जब तक हम मामले की सुनवाई नहीं करते तब तक अंतरिम आदेश से संसद द्वारा लागू की गई व्यवस्था को रोका नहीं जा सकेगा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची तथा जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने डिजिटल समाचार प्लेटफार्म \“द रिपोर्टर्स कलेक्टिव\“ की ओर से वेंकटेश नायक, पत्रकार नितिन सेठी और राष्ट्रीय जन अधिकार अभियान (एनसीपीआरआई) द्वारा दायर तीन याचिकाओं को उच्च पीठ के पास भेज दिया।
इन याचिकाओं में विश्वसनीय खंडों पर चिंता जताई गई है, जो केंद्र सरकार को अपने विवेक से किसी भी डाटा विश्वसनीय संस्था से डाटा प्राप्त करने की अनुमति देते हैं। पीठ ने कहा कि मामला जटिल और संवेदनशील मुद्दों से संबंधित है और इसमें दो परस्पर विरोधी मौलिक अधिकारों, सूचना के अधिकार और निजता के अधिकार के बीच संतुलन बनाना शामिल है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह परस्पर विरोधी हितों के बीच संतुलन बनाने का मामला है। हमें सभी जटिलताओं को दूर करना होगा और यह निर्धारित करना होगा कि व्यक्तिगत जानकारी क्या होती है।
याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुभाष अग्रवाल के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सूचना के अधिकार और निजता के बीच संतुलन बनाने के लिए पहले ही एक ढांचा स्थापित कर दिया है। हालांकि, पीठ ने कहा कि नए विधायी ढांचे के लिए एक नए और गहन विश्लेषण की आवश्यकता है। |
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