मेडिकल बोर्ड की देखरेख में दुष्कर्म पीड़िता के अबॉर्शन का आदेश।
विधि संवाददाता, देवरिया। विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) वीरेंद्र सिंह की कोर्ट ने सोमवार को दुष्कर्म पीड़ित किशोरी का गर्भपात चिकित्सीय बोर्ड की देखरेख में कराने का आदेश सीएमओ को दिया है। साथ ही भ्रूण की डीएनए सैंपलिंग कराकर उसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं। डीएम को निर्देश दिया है कि पीड़िता के स्वास्थ्य व सुरक्षा से संबंधित समस्त खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
कोर्ट ने दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामले में चिकित्सीय रिपोर्ट तैयार करने में हुई देरी और लापरवाही पर सीएमओ की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया है।
रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र में किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद दर्ज प्राथमिकी के आधार पर चिकित्सीय जांच की गई, जिसमें पीड़िता के सात सप्ताह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। चिकित्सीय रिपोर्ट में उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति अत्यंत खराब बताई गई।
इसके बाद स्वजन ने कोर्ट से गर्भ गिराने की अनुमति देने की मांग की। कोर्ट ने 17 जनवरी को मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया था कि पीड़िता की चिकित्सीय आख्या मेडिकल बोर्ड से कराकर अविलंब न्यायालय में प्रस्तुत की जाए, किंतु रिपोर्ट सात फरवरी को प्रस्तुत की गई। इस देरी को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने असंतोष जताया।
चिकित्सीय रिपोर्ट, उच्चतम न्यायालय के निर्णयों व प्रासंगिक कानूनी प्रविधानों के आलोक में कोर्ट ने माना कि यौन हमले, बलात्कार या कौटुंबिक व्यभिचार के मामलों में उत्तरजीवी को गर्भ समापन की अनुमति देना न्यायोचित है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़िता का गर्भ समापन विधिक व चिकित्सीय प्रविधानों के तहत, उसके जीवन व स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मेडिकल बोर्ड की निगरानी में कराया जाए।
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