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सावधान! पाकिस्तान के हनीट्रैप में फंस रहे भारतीय पुलिसकर्मी, पंजाब से आ चुके कई मामले; MHA ने जारी की सख्त चेतावनी

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पाक एजेंसियां सोशल मीडिया पर पुलिस को हनीट्रैप कर रही हैं (फाइल फोटो)



रोहित कुमार, चंडीगढ़। एक फ्रेंड रिक्वेस्ट, एक मुस्कुराती प्रोफाइल फोटो और कुछ मीठी बातें… फिर अचानक गोपनीय सवाल। यही तरीका अपनाकर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां सोशल मीडिया पर भारतीय पुलिसकर्मियों को हनीट्रैप में फंसाने की कोशिश कर रही हैं।

इसे गंभीर खतरा मानते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने पुलिस के लिए एक सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसपीओ) जारी किया है, जिसे ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) के जरिए सभी राज्यों में लागू किया गया।

एमएचए के अनुसार, पाकिस्तान के खुफिया ऑपरेटिव (पीआईओएस) फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, वाट्सएप, टेलीग्राम और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। ये लोग खुद को पत्रकार, रिसर्चर या रिटायर्ड अधिकारी बताकर संपर्क करते हैं। एसओपी में खास चेतावनी दी गई है कि युवा और आकर्षक महिला प्रोफाइल अक्सर हनीट्रैप का सबसे बड़ा हथियार होती हैं, जिनसे लोग जल्दी भावनात्मक जुड़ाव बना लेते हैं।

इन मामलों के बाद एमएचएच की एसपीओ को और सख्ती से लागू किया गया। एसपीओ के तहत पुलिसकर्मियों को इंटरनेट मीडिया पर अपनी पहचान छिपाने, ऑफिस से जुड़ी फोटो-वीडियो न डालने और अनजान लोगों से दोस्ती न करने के निर्देश दिए गए हैं। नौकरी, नकद इनाम, फ्री ट्रिप या सरकारी स्कीम के नाम पर भेजे गए लिंक पर क्लिक न करने की सलाह भी दी गई है।

एसपीओ यह भी कहती है कि अगर किसी का अकाउंट या मोबाइल संदिग्ध तरीके से हैक या कंप्रोमाइज लगे, तो तुरंत डिवाइस जब्त कर खुफिया ब्यूरो की काउंटर इंटेलिजेंस विंग के साथ जांच की जाए। मजबूत पासवर्ड, 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और प्राइवेसी सेटिंग्स को नियमित जांचने पर भी जोर दिया गया है। पुलिसकर्मियों को अपनी ऑनलाइन प्रोफाइल की दृश्यता सीमित रखने को कहा गया है, ताकि केवल संपर्क सूची में शामिल लोग ही पोस्ट देख सकें।

संदेशों में डिस्क्लेमर का उपयोग करने, अनजान लिंक पर क्लिक न करने और नौकरी, नकद इनाम, मुफ्त यात्रा या सरकारी स्रोत बताकर भेजे गए ऑफर से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। बिना सत्यापन के ऐप डाउनलोड करना और कई इंटरनेट मीडिया अकाउंट को आपस में लिंक करना भी हतोत्साहित किया गया है । सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी भी तरह से आधिकारिक संवाद के लिए न किया जाए। अगर किसी पुलिसकर्मी का डिजिटल प्लेटफॉर्म या डिवाइस संदिग्ध रूप से समझौता हो जाए, तो एसपीओ के अनुसार तुरंत डिवाइस जब्त कर ली जाएगी। ताकि डेटा डिलीट न किया जा सके।

अमृतसर केस (18 जुलाई 2023): अमृतसर में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल को फेसबुक पर एक महिला प्रोफाइल के जरिए संपर्क किया गया। खुद को भारतीय बताने वाली इस प्रोफाइल ने धीरे-धीरे उससे दोस्ती बढ़ाई और फिर सुरक्षा से जुड़ी सामान्य जानकारियां पूछनी शुरू की। जांच में सामने आया कि अकाउंट पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहा था और इसका मकसद संवेदनशील जानकारी हासिल करना था। कांस्टेबल को समय रहते सस्पेंड कर पूछताछ की गई।

तरनतारन केस (9 नवंबर 2022): तरनतारन जिले में एक पुलिसकर्मी को इंस्टाग्राम पर जर्नलिस्ट बनकर एक अकाउंट ने फंसाया। बातचीत के दौरान उसे बार्डर एरिया की तस्वीरें और वीडियो भेजने के लिए कहा गया। बाद में पंजाब पुलिस और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त जांच में सामने आया कि यह एक हनीट्रैप नेटवर्क था, जिसके तार पाकिस्तान से जुड़े थे।

गुरदासपुर केस (4 मार्च 2024): गुरदासपुर में एक सरकारी कर्मचारी को लिंक्डइन के जरिए संपर्क किया गया। सामने वाला खुद को यूके बेस्ड रिसर्चर बता रहा था। बातचीत के दौरान उसने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा ढांचे से जुड़े सवाल पूछे। आईपी ट्रेसिंग में अकाउंट पाकिस्तान से जुड़ा मिला, जिसके बाद साइबर सेल ने अकाउंट ब्लाक करवाया।

बीएसएफ जवान केस (27 मई 2023): पंजाब सेक्टर में तैनात एक बीएसएफ जवान को वाट्सएप पर महिला प्रोफाइल ने संपर्क किया। धीरे-धीरे जवान से लोकेशन और यूनिट से जुड़ी जानकारी ली जा रही थी। जांच में यह मामला पाक हैंडलर से जुड़ा निकला और जवान के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।

संदेश साफ है : डिजिटल दुनिया में दोस्ती से पहले सतर्कता जरूरी है, क्योंकि एक गलत क्लिक सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।
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