जागरण संवाददाता, लखनऊ। कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में प्रोटान बीम थेरेपी (पीबीटी) से ट्यूमर पर सटीक वार होगा। पीबीटी कई तरह के कैंसर के इलाज की एक अत्याधुनिक और सटीक तकनीक है, जो उच्च-ऊर्जा प्रोटान कणों का उपयोग करके आसपास के स्वस्थ ऊतकों को कम नुकसान पहुंचाते हुए ट्यूमर (रसोली) को सीधे नष्ट करती है।
यह पारंपरिक रेडियोथेरेपी की तुलना में कई गुणा अधिक सटीक होती है, क्योंकि यह ट्यूमर में कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को तोड़ देती है, जिससे ट्यूमर बढ़ना बंद होकर सिकुड़ने लगता है।
वर्तमान में पीबीटी केंद्र देश में सिर्फ टाटा हास्पिटल मुंबई और अपोलोमेडिक्स चेन्नई में है। संस्थान की 12वीं शासी निकाय की बैठक बुधवार को लोक भवन में मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में केंद्र की स्थापना के साथ कई प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
संस्थान के निदेशक डा. एमएलबी भट्ट ने बताया कि प्रोटीन बीम थेरेपी केंद्र की स्थापना में करीब 550 करोड़ की लागत आएगी। संस्थान में पीबीटी की सुविधा शुरू होने से हजारों जरूरतमंद मरीजों का इलाज संभव हो सकेगा।
इस तकनीक से उपचार काफी महंगा है, लेकिन यहां पीबीटी से उपचार की दर बहुत कम होगी, जिससे गरीब मरीज का भी इलाज संभव हो सकेगा।
प्रोटान बीम थेरेपी से मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, सिर-गर्दन, फेफड़ों, प्रोस्टेट और बच्चों के ट्यूमर जैसे संवेदनशील अंगों के कैंसर का सटीक उपचार संभव है, जिसमें स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं होता है। यह तकनीक प्राथमिक और दूसरे चरण के कैंसर के लिए अत्यधिक प्रभावी है।
शिक्षकों के 31 नए पद भी मंजूर
शासन ने संस्थान में शिक्षकों के 31 नए पदों के साथ ही 78 सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट की भी मंजूरी दे दी है। शिक्षकों की नियुक्ति सर्जिकल, गायनकोलाजिकल आंकोलाजी, न्यूरोसर्जरी, एनेस्थीसियोलाजी, पैथोलाजी, कैंसर जेनेटिक्स और रेडिएशन आंकोलाजी विभाग में होगी।
साथ ही आंको-पैथोलाजी में पोस्ट-डाक्टरल सर्टिफिकेट कोर्स, गायनकोलाजिकल आंकोलाजी और सर्जिकल आंकोलाजी में एमसीएच पाठ्यक्रम शुरू करने पर सहमति बनी।
इसके साथ ही पीएचडी के नए अध्यादेश को भी मंजूरी प्रदान की गई। इसके अलावा रेडियोडायग्नोसिस विभाग में टेली-रेडियोलाजी सेवाओं की अनुमति भी दी गई।
मरीजों को एमआरआइ, सीटी स्कैन, एक्स-रे और डिजिटल मैमोग्राफी की रिपोर्ट आनलाइन मिलेगी। इसके अतिरिक्त एडवांस्ड कैंसर रिसर्च सेंटर की स्थापना, एडवांस्ड मालिक्यूलर लैब, सेंटर फार एडवांस मालिक्यूलर डायग्नोस्टिक एंड रिसर्च फार कैंसर की स्थापना की मंजूरी मिली।
संस्थान रखेगा कैंसर के मरीजों का लेखा-जोखा
डा. एमएलबी भट्ट ने बताया कि बैठक में पापुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। ऐसे में राजधानी समेत प्रदेशभर में कैंसर मरीजों का लेखा-जोखा रखा जाएगा।
इससे कैंसर के वास्तविक बोझ और कैंसर की वजह से होने वाली मौतों का सटीक आंकलन किया जा सकेगा। इस दौरान संस्थान के रजिस्ट्रार डा. आयुष लोहिया, सीएमएस डा. विजयेंद्र कुमार और चिकित्सा अधीक्षक डा. वरुण विजय भी मौजूद रहे। |