ओडिशा हाई कोर्ट
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के समय कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन पुलिस अधिकारी द्वारा न किए जाने की घटना पर हाईकोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया है। अवैध गांजा तस्करी के मामले में मलकानगिरी जिले के पड़िया थाना में दर्ज केस में गिरफ्तार नाजिम मलिक की हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर कर दी है।
हाईकोर्ट ने मलकानगिरी की विशेष अदालत को निर्देश दिया है कि एक लाख रुपये के दो जमानतदारों के बदले आवेदक को जमानत पर रिहा किया जाए। न्यायमूर्ति गौरीशंकर सतपथी की अध्यक्षता वाली पीठ ने नाज़िम की नियमित जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
डीएसपी ने मांगी माफी
दूसरी ओर, इस मामले के जांच अधिकारी तथा पड़िया थाना के तत्कालीन डीएसपी रामेश्वर प्रधान वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए और शपथ-पत्र दाखिल कर माफी मांगी। उनके द्वारा पहले प्रस्तुत किए गए लिखित बयान में अपमानजनक और अशोभनीय शब्दों के प्रयोग के संदर्भ में उन्होंने खेद व्यक्त किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी भाषा का प्रयोग करने का उनका कोई इरादा नहीं था और भविष्य में वे अधिक सावधान रहेंगे—यह बात शपथ-पत्र में उल्लेखित की गई। हाईकोर्ट ने शपथ-पत्र को स्वीकार करते हुए उन्हें भविष्य में सतर्क रहने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए चेतावनी दी।
गिरफ्तार किए जाने के बाद गिरफ्तारी के आधार की जानकारी देने अनिवार्य
हाईकोर्ट ने कहा कि कानून में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाने के बाद और अदालत में पेश किए जाने से पर्याप्त समय पूर्व, उसे गिरफ्तारी के आधार की जानकारी दी जानी चाहिए। गिरफ्तारी के आधार उस भाषा और लिपि में बताए जाने चाहिए जिसे गिरफ्तार/हिरासत में लिया गया व्यक्ति समझ और पढ़ सके। गिरफ्तार करने वाले अधिकारी के लिए यह अनिवार्य है।
संविधान के अनुच्छेद 22(1) के अनुसार, गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में सूचित किया जाना आवश्यक है। बीएनएस की धारा 47 के तहत भी, गिरफ्तारी के आधार की जानकारी देना गिरफ्तार करने वाले अधिकारी की अनिवार्य जिम्मेदारी है। |