जागरण संवाददाता, हरदोई। मेडिकल कालेज अस्पताल में हर माह व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। इमरजेंसी के रेड और एलो जोन वार्ड में आधे से ज्यादा बिजली के बोर्ड खराब पड़े हैं, जिससे कंसंट्रेटर और मानीटर तक नहीं चल पा रहे। मरीजों को जरूरी उपकरणों से जोड़ने के लिए कर्मचारियों को बेड बदलने पड़ रहे हैं। अव्यवस्थाओं का खामियाजा मरीजों के साथ-साथ वार्ड स्टाफ को भी भुगतना पड़ रहा है।
अस्पताल में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए रिजर्व फीडर की व्यवस्था है, फिर भी बिजली आए दिन गुल हो जाती है। जनरेटर भी पर्याप्त सहारा नहीं दे पा रहे। सबसे गंभीर बात यह है कि बिजली उपकरणों की मरम्मत नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया से नहीं कराई जा रही। कोई एजेंसी नामित न होने के कारण अस्पताल प्रशासन खुद ही मैकेनिक बुलाकर काम करा रहा है।
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
ऐसे में पंखे, कूलर या अन्य उपकरणों की मरम्मत में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। वार्डों में कहीं बिजली के बोर्ड फुके पड़े हैं तो कहीं कटे तार खुले में लटक रहे हैं, जो हादसे को न्योता दे रहे हैं। इमरजेंसी के रेड जोन के 10 नंबर बेड पर यदि बोर्ड खराब है तो मरीज को दूसरे बेड पर शिफ्ट करना पड़ता है। एक मरीज के साथ दूसरे मरीज को भी असुविधा झेलनी पड़ती है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
इमरजेंसी के रेड व एलो जोन वार्ड में बिजली के बोर्ड खराब होने की शिकायत मिली है। बिजली उपकरणों की मरम्मत के लिए अभी कोई एजेंसी नामित नहीं है। फिलहाल मैकेनिक बुलाकर काम कराया जा रहा है। शुक्रवार तक बोर्डों की मरम्मत करा दी जाएगी।
डा. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कालेज, हरदोई
प्लांट बंद, बेड तक नहीं पहुंच रही आक्सीजन
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अस्पताल में दो आक्सीजन प्लांट स्थापित हैं, जिनसे पाइपलाइन के जरिए वार्डों के बेड तक आक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था है। लेकिन प्लांट बंद रहने से मरीजों को सीधे बेड पर आक्सीजन नहीं मिल पा रही। कंसंट्रेटर और सिलिंडरों के सहारे काम चलाया जा रहा है। अब जब बिजली के बोर्ड ही खराब हैं तो कंसंट्रेटर भी नहीं चल पा रहे। ऐसे में गंभीर मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। |