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गंगा पर खास तकनीक से बनेगा तटबंध, शासन ने दी मंजूरी... तटीय गांवों को मिलने जा रहा बड़ा लाभ

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बिजनौर में गंगा पर बना रावली बैराज तटबंध। जागरण



जागरण संवाददाता, बिजनौर। गंगा के तटीय गांवों के साथ ही जिला मुख्यालय को इस वर्ष बाढ़ और कटान के खतरे से निजात मिल जाएगी। शासन ने गंगा पर लगभग एक किलोमीटर लंबे तटबंध को पक्का करने की अनुमति दे दी है। गंगा पर एसीबीएम (आर्टिकुलेटिंग कांक्रीट ब्लाक मैट्रेस) तकनीक से तटबंध बनाया जाएगा। इसके लिए शासन ने 40 करोड़ रुपये का बजट मंजूर कर दिया है। गंगा में सिल्ट के टापू साफ कर चैनल बनाने का काम भी जल्दी शुरू होने की उम्मीद है। इन दोनों काम के होने से खादर को बाढ़ का खतरा खत्म हो जाएगा।

गंगा का पानी जिले में 115 किलोमीटर की धारा में आशीर्वाद के रूप में बहता है। गंगा की धारा तटीय गांवों के लिए बरसात में खतरा भी बन जाती है। पहाड़ों की बरसात का पानी नदियों के माध्यम से जिले में खादर क्षेत्र में आता है। गंगा की धारा उफनती है और इसका पानी मंडावर के आसपास के गांवों के हजारों बीघा खेतों में भर जाता है। रावली के खादर में गंगा की धारा की चौड़ाई पांच किलोमीटर से अधिक है।

गंगा हर बार थोड़ा गांवों की ओर खिसक आती है। पिछले वर्ष सितंबर में गंगा उफनती धारा ने रावली बैराज तटबंध को बहुत बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया। तटबंध गंगा की धारा की मार को झेल नहीं सका और मिट्टी बुरी तरह कटकर बह गई। गंगा के तटबंध के टूटने में कोई कसर नहीं बची थी, बस मां गंगा ने ही लोगों पर दया दिखाई। तटबंध टूटने से बाढ़ की आशंका को देखते हुए आसपास के कई गांवों को खाली करा दिया गया था।

तटबंध बचाने के लिए सिंचाई विभाग के आला अधिकारी तक आ गए और अपनी आंखों के सामने काम कराने लगे। एनएचएआइ ने भी सहयोग किया गया। तटबंध पर दिन रात कई दिन तक मिट़्टी डाली गई और उसे टूटने से बचा लिया गया। अब तटबंध को फिर से पहले की तरह मजबूत करने के लिए उसे एसीबीएम तकनीक से बनाया जाएगा। इससे पहले इस तकनीक से सरयू नदी पर बस्ती, संत कबीरनगर और देवरिया जिले में ही काम हुआ है। इसका प्राेजेक्ट एक हजार 60 मीटर का बनाया गया है। इसकी लागत लगभग 40 करोड़ रुपये होगी। इस प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी दे दी है। जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा।

ऐसे होगा काम
तटबंध के क्षतिग्रस्त एरिया के स्लोप को ठीक करके एसीबीएम तकनीक से काम किया जाएगा। इसमें जीओ शीट के बैग के अंदर मिक्स कांक्रीट प्रेशर मशीन से डाला जाएगा। इस तरह अलग अलग कांक्रीट के स्लोप बन जाएंगे। इस ब्लाक व कांक्रीट को लोहे की केबल से रिइंफोर्स किया जाएगा यानि एक दूसरे से जोड़ा जाएगा। यह इस तरह होगा जैसे मकान की छत में सरिया डाला जाता है उसकी जगह लोहे की केबल डाली जाएगी। यह लचीला बनेगा। ब्लाक की ज्वाइंट में लचक होने से इसे नुकसान नहीं होगा। तटबंध के पूरे स्लोप व तली पर कांक्रीट की चादर बिछ जाएगी।

दो प्रस्तावों पर होगा काम
गंगा की धारा के बीच में बने रेत के टापू भी कटान और बाढ़ का कारण बनते हैं। इससे कई बार गंगा की धारा एक ओर दबाव देकर बहती है। इन टापुओं को हटाने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक अनुमति मिल गई है। इन दोनों प्रोजेक्ट पर जल्दी ही काम शुरू होने का अनुमान है।

जल्दी शुरू होगा काम
गंगा के तटबंध पर काम कराने का प्रोजेक्ट स्वीकार कर लिया गया है। इसका काम जल्दी शुरू होगा। बरसात से पहले पहले काम पूरा कर लिया जाएगा।
ब्रजेश मौर्य, अधिशासी अभियंता- सिंचाई विभाग
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