दुष्कर्म मामले में चंडीगढ़ जिला अदालत ने सुनाया फैसला।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। दुष्कर्म मामले में 70 दिन देरी से एफआईआर होने का फायदा आरोपित को मिला है। जिला अदालत ने नाबालिग को अग्रिम जमानत दे दी। उसके खिलाफ छह फरवरी को मलोया थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। हालांकि, उसे गिरफ्तार नहीं किया गया था।
नाबालिग ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत अर्जी दायर की। उसके वकील दीपक राणा ने अदालत में कहा कि पुलिस ने उसे झूठे केस में फंसाया था। शिकायतकर्ता ने वारदात नवंबर 2025 की बताई जबकि पुलिस ने एफआईआर फरवरी 2026 में दर्ज की। इन 70 दिनों की देरी का पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है।
वकील ने कहा कि वह पुलिस की जांच के शामिल होने के लिए तैयार हैं। इस आधार पर उन्होंने अग्रिम जमानत की मांग की। हालांकि सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया, लेकिन दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपित को अग्रिम जमानत दे दी।
इससे पहले शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया था एक रिश्तेदार की शादी के दौरान आरोपित ने उसकी ड्रिंक में कुछ नशा मिला दिया। इसके बाद बाद उसने उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित पर केस दर्ज किया था। |