अर्बन कोओपरेटिव बैंक को अल्मोड़ा अर्बन कोओपरेटिव बैंक में मर्ज करने की तैयारी। प्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, देहरादून। अर्बन कोओपरेटिव बैंक देहरादून में सामने आए घोटाले में एक बात यह लगभग साफ की जा चुकी है कि बैंक का वित्तीय ढांचा चरमरा गया है। क्योंकि, बैंक घाटे में था, लेकिन उसे फायदे में दिखाया जाता रहा।
लिहाजा, अंततः आरबीआइ ने शिकंजा कसा और बैंक पर छह माह की रोक लगा दी। अब बैंक के समक्ष दो ही रास्ते हैं। एक यह कि बैंक हाथ खड़े कर दे। जिसके बाद आरबीआइ परिसमापक (लिक्विडेटर) नियुक्त कर लेनदारी और देनदारी के मुताबिक बैंक को समाप्त कर दे।
यह रास्ता अधिक कष्टकारी होगा और बड़ी संख्या में खाताधारक नुकसान में जा सकते हैं। क्योंकि, बताया जा रहा है कि बैंक को अभी 50 से 58 करोड़ रुपए के बीच की कर्ज की वसूली करनी है। वहीं, खाताधारकों के 124 करोड़ बैंक में जमा हैं। सभी तरह के वित्तीय विकल्पों के बाद भी बैंक 105 करोड़ रुपए के करीब ही जुटा पाएगा।
दूसरा विकल्प यह है कि बैंक किसी सक्षम बैंक में अपना मर्जर (विलायीकरण) करा दे। इस स्थिति में खाताधारकों की पूरी रकम सुरक्षित रहेगी और कर्ज की वसूली में भी तेजी आ सकेगी। अर्बन कोओपरेटिव बैंक प्रबंधन को भी यही राह अधिक बेहतर नजर आ रही है।
बैंक के चेयरमैन मयंक ममगाईं के अनुसार बैंक के विलय के लिए अलमोड़ा अर्बन कोओपरेटिव बैंक को प्रस्ताव दे दिया गया है। उन्होंने बैंक से सभी तरह के आवश्यक रिकार्ड मांगे हैं। कई रिकार्ड उपलब्ध भी करा दिए गए हैं। अभी तक की स्थिति के अनुसार अल्मोड़ा बैंक संतुष्ट नजर आ रहा है। वहीं, इस मर्जर के बारे में आरबीआइ को भी सूचित कर दिया गया है।
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