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बुधदेव वक्री की अवधि (Image Source: AI-Generated)
आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। ज्योतिष शास्त्र में बुधदेव को बुद्धि, वाणी, तर्क और व्यापार का मुख्य कारक माना जाता है। हमारी निर्णय लेने की शक्ति और सूचनाओं का सही संचालन पूरी तरह बुधदेव की कृपा पर ही निर्भर करता है। 26 फरवरी 2026 को बुधदेव कुंभ राशि में वक्री होने जा रहे हैं, जिसका अर्थ है कि वे अब उल्टी चाल चलेंगे। कुंभ राशि नवीन विचारों और सामाजिक नेटवर्क की राशि है, इसलिए बुधदेव की इस वक्री गति का प्रभाव हमारे भविष्य के लक्ष्यों और मित्रों के साथ संबंधों पर विशेष रूप से पड़ेगा। जब बुद्धि के अधिपति अपनी दिशा बदलते हैं, तो जीवन में अचानक भ्रम और कार्यों में देरी की आशंका बढ़ जाती है।
वक्री बुधदेव की इस अवधि में उनकी ऊर्जा बाहर के बजाय भीतर की ओर मुड़ जाती है। यह समय नई शुरुआत करने के बजाय आत्म-चिंतन करने और पुरानी योजनाओं को फिर से व्यवस्थित करने के लिए अत्यंत शुभ है। यदि हम अपनी वाणी और कार्यों में सहजता बनाए रखते हैं, तो इस कठिन समय को भी एक अवसर में बदला जा सकता है। हालांकि, ग्रहों का यह बदलाव हर जातक के लिए अलग परिणाम लेकर आता है। जहां कुछ राशियों को अपनी पिछली गलतियों को सुधारने का मौका मिलेगा, वहीं कुछ राशियों को संचार और यात्रा के मामलों में बहुत अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी ताकि किसी भी प्रकार की बड़ी हानि से बचा जा सके।
भूलकर भी न करें ये 3 बड़े काम
महत्वपूर्ण समझौतों और अनुबंधों पर हस्ताक्षर
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, बुधदेव हमारी बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता के स्वामी हैं। जब वे वक्री होते हैं, तो अक्सर हमारी सोचने-समझने की शक्ति थोड़ी धुंधली पड़ जाती है और विवेक में भ्रम पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है। इस दौरान किसी भी नए व्यापारिक सौदे, प्रॉपर्टी के कागजात या बड़े कानूनी समझौतों पर हस्ताक्षर करने में जल्दबाजी न दिखाएं।
कागजों में रह गई एक छोटी सी तकनीकी गलती या किसी नियम को ठीक से न समझ पाना भविष्य में आपके लिए बड़ी कानूनी मुश्किल खड़ी कर सकता है। यदि किसी कारणवश हस्ताक्षर करना बहुत जरूरी हो, तो दस्तावेजों को बार-बार गौर से पढ़ें और किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
(Image Source: AI-Gene)
वित्तीय जोखिम और असुरक्षित निवेश
बुधदेव ही हमारे व्यापार और धन को नियंत्रित करते हैं। उनकी उल्टी चाल के दौरान बाजार के आंकड़ों का आकलन करने या वित्तीय मामलों में गलतफहमी होने की आशंका रहती है। इसलिए, यह समय शेयर बाजार में बड़े रिस्क लेने, निवेश या किसी भी असुरक्षित जगह पैसा लगाने के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। विशेष रूप से परिवार के साथ जुड़े धन के मामलों में कोई भी बड़ा फैसला फिलहाल टाल देना ही समझदारी है। वित्तीय बातचीत में स्पष्टता न होने से आपकी साख और जमा-पूंजी दोनों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। बेहतर यही होगा कि आप अभी निवेश की नई योजनाओं पर काम करने के बजाय पुरानी रणनीतियों की केवल समीक्षा करें।
वाणी में आवेग और संचार में जल्दबाजी
वक्री बुधदेव का सबसे सीधा और गहरा प्रभाव हमारी वाणी और संवाद करने के तरीके पर पड़ता है। इस समय बिना सोचे-समझे बोलना या भावनाओं में आकर कोई तीखी प्रतिक्रिया देना आपके पेशेवर और निजी रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है। अक्सर इस दौरान सूचनाओं के गलत आदान-प्रदान और संदेशों के गलत अर्थ निकलने की आशंका सबसे अधिक रहती है।
विशेष रूप से पेशेवर नेटवर्क और साझेदारी के मामलों में, किसी भी प्रकार के बड़े वादे करने में जल्दबाजी न करें। बुधदेव की यह वक्री चाल हमें सिखाती है कि हम अपनी बात को बहुत धैर्य और स्पष्टता के साथ दूसरों के सामने रखें। इस कठिन समय में अपनी वाणी में सहजता बनाए रखना ही सफलता प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग है।
क्या वक्री बुधदेव हमेशा नुकसान ही कराते हैं?
अक्सर \“वक्री\“ नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यह समय आत्म-सुधार के लिए एक वरदान की तरह है। कुंभ राशि में बुधदेव का पीछे मुड़ना आपको उन पुराने संपर्कों और भूली-बिसरी रणनीतियों की ओर ले जाता है, जिन्हें आपने बीच में छोड़ दिया था। यह समय \“रिव्यू\“ और \“रिवाइज\“ करने का है। यदि आप किसी पुराने बिजनेस आइडिया पर काम करना चाहते हैं या पुराने मित्रों से फिर से संबंध स्थापित करना चाहते हैं, तो बुधदेव की यह उल्टी चाल आपको अद्भुत सफलता दिला सकती है।
लेखक: श्री आनंद सागर पाठक, astropatri.com, फीडबैक के लिए लिखें: hello@astropatri.com |
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