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ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कानून से खिलवाड़, बिना लाइसेंस धड़ल्ले से बिक रहे ड्रोन-जैमर; नोटिस जारी

LHC0088 2 hour(s) ago views 161
  

CCPA ने छह ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किया



जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ऑनलाइन बाजार में ऐसे उपकरण धड़ल्ले से बेचे जा रहे थे, जिनपर सरकार का सख्त नियंत्रण है। लाइसेंस और मंजूरी के बिना ऐसी छह ई-कामर्स कंपनियों की चोरी पकड़ी गई है, जो एंटी ड्रोन सिस्टम और जैमर की बिक्री कर रही थीं। ये उपकरण सामान्य इलेक्ट्रानिक सामान नहीं होते।

ये रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल को बाधित करते हैं, जिससे ड्रोन या जीपीएस सिस्टम काम करना बंद कर सकते हैं। सुरक्षा कारणों से ऐसे उपकरणों पर नियंत्रण रखा जाता है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है।
CCPA का छह ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस

इन कंपनियों में एवरसे, इंडिया मार्ट, एक्सबूम, जावियट एयरोस्पेस, मैवरिक ड्रोन एंड टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड एवं एयरवन रोबोटिक्स शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच ऐसे उपकरणों की अनियंत्रित बिक्री राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।

इन उपकरणों को अगर चालू किया जाए तो आसपास उड़ रहे ड्रोन या जीपीएस आधारित सिस्टम काम करना बंद कर सकते हैं। इसी वजह से सुरक्षा के लिहाज से इन उपकरणों की बिक्री और उपयोग पर कड़ा नियंत्रण रखा जाता है।

आम नागरिक इन्हें न तो खरीद सकते हैं और न ही इस्तेमाल कर सकते हैं। आमतौर पर इनकी अनुमति केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों या सुरक्षा बलों को दी जाती है। कानून भी इसपर स्पष्ट है।
बिना लाइसेंस बेचे जा रहे ड्रोन-जैमर

इंडियन टेक्नोलाजी एक्ट-1885 एवं वायरलेस टेलीग्राफी एक्ट-1933 के तहत ऐसे उपकरणों के स्वामित्व और उपयोग को नियंत्रित रखना है। इसके अलावा आयात के मामले में भी सख्त नियम लागू होते हैं और संबंधित विभाग से मंजूरी जरूरी होती है। बिना लाइसेंस इनका व्यापार करना कानून का उल्लंघन माना जाता है।

सीसीपीए का कहना है कि जिन प्लेटफा‌र्म्स पर ये उत्पाद सूचीबद्ध थे, वहां कहीं भी यह साफ नहीं लिखा गया था कि इन्हें खरीदने के लिए विशेष लाइसेंस या सरकारी अनुमति चाहिए। न ही वैध प्रमाणन या मंजूरी से जुड़ी जानकारी दी गई थी।
राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा

इससे आम खरीदार को यह लग सकता है कि यह सामान सामान्य रूप से उपलब्ध है। प्राधिकरण के अनुसार इस तरह जरूरी जानकारी छिपाना उपभोक्ताओं को गुमराह करना है और यह अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आ सकता है।

नोटिस में कंपनियों से पूछा गया है कि इन उपकरणों का स्त्रोत क्या है। क्या उनके पास जरूरी लाइसेंस और मंजूरी है। पिछले दो वर्षों में कितनी बिक्री हुई और किन-किन लोगों ने खरीदा। साथ ही यह भी बताने को कहा गया है कि भविष्य में ऐसी लि¨स्टग रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
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