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भारत में बैठे-बैठे खरीदने हैं टेस्ला-एप्पल जैसे शेयर, तो ऐसे लगाएं पैसा; ETF-FoF समेत ये 5 तरीकें आएंगे काम

Chikheang 6 hour(s) ago views 298
  

भारत में बैठे-बैठे विदेशी शेयरों में निवेश कैसे करें?



नई दिल्ली। आज के डिजिटल युग में निवेश की दुनिया सीमाओं से परे हो चुकी है। पहले विदेशी बाजारों में निवेश करना जटिल और महंगा माना जाता था, लेकिन अब भारत में बैठे-बैठे भी वैश्विक कंपनियों और अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करना संभव है। दुनिया की बड़ी कंपनियाँ जैसे Apple, Amazon और Tesla जैसे ब्रांड वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय निवेश से न केवल पोर्टफोलियो में विविधता आती है, बल्कि अलग-अलग देशों की आर्थिक प्रगति का लाभ भी मिलता है। आइए जानते हैं भारत से विदेशों में निवेश (How to Invest in Abroad) करने के पाँच प्रमुख तरीके।
अंतरराष्ट्रीय शेयरों में सीधा निवेश

आज कई भारतीय ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म विदेशी शेयर बाजारों तक पहुंच प्रदान करते हैं। इस तरीके से आप सीधे किसी विदेशी कंपनी के शेयर खरीद सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप तकनीकी क्षेत्र में विश्वास रखते हैं तो आप वैश्विक टेक कंपनियों में निवेश कर सकते हैं।
सीधा शेयर निवेश आपको कंपनी के प्रदर्शन का सीधा लाभ देता है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़ा होता है क्योंकि विदेशी बाजारों में उतार-चढ़ाव अधिक हो सकता है। साथ ही मुद्रा विनिमय दर (करेंसी फ्लक्चुएशन) का असर भी रिटर्न पर पड़ता है।
इंटरनेशनल ETF के जरिए निवेश

ETF (Exchange Traded Fund) एक ऐसा फंड होता है जो किसी विशेष इंडेक्स या सेक्टर को ट्रैक करता है। अंतरराष्ट्रीय ETF के माध्यम से आप एक साथ कई विदेशी कंपनियों में निवेश कर सकते हैं।
यह तरीका उन निवेशकों के लिए बेहतर है जो कम लागत में विविधता चाहते हैं। ETF स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर की तरह खरीदे और बेचे जाते हैं, इसलिए इनमें लिक्विडिटी भी अच्छी होती है। यह तरीका जोखिम को फैलाने (Diversification) का आसान माध्यम है।
अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड

भारतीय एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ ऐसे म्यूचुअल फंड चलाती हैं जो विदेशों के शेयर बाजारों में निवेश करते हैं। इन फंडों के जरिए निवेशक बिना सीधे विदेशी खाता खोले वैश्विक बाजार का हिस्सा बन सकते हैं। म्यूचुअल फंड में प्रोफेशनल फंड मैनेजर निवेश का प्रबंधन करते हैं, जिससे रिसर्च का बोझ निवेशक पर नहीं पड़ता। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एक सुविधाजनक और व्यवस्थित तरीका है।
फंड ऑफ फंड (FoF) के माध्यम से निवेश

फंड ऑफ फंड वह योजना होती है जो सीधे शेयरों में नहीं बल्कि किसी अंतरराष्ट्रीय फंड में निवेश करती है। यानी आपका पैसा एक भारतीय फंड के जरिए विदेशी फंड में लगाया जाता है। यह तरीका उन निवेशकों के लिए अच्छा है जो वैश्विक विविधता चाहते हैं, लेकिन सीधे विदेशी बाजार की जटिलताओं से बचना चाहते हैं। हालांकि इसमें लागत थोड़ी अधिक हो सकती है क्योंकि दो स्तरों पर प्रबंधन शुल्क लगता है।
ग्लोबल थीम आधारित ETF या फंड

यदि आप किसी खास सेक्टर या थीम—जैसे टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर या ग्रीन एनर्जी—में निवेश करना चाहते हैं, तो ग्लोबल थीम आधारित ETF या म्यूचुअल फंड अच्छा विकल्प हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए, स्वच्छ ऊर्जा या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर कई कंपनियाँ कार्य कर रही हैं। थीम आधारित निवेश से आप भविष्य की संभावनाओं पर दांव लगा सकते हैं, लेकिन इसमें जोखिम भी अधिक होता है क्योंकि यह किसी एक सेक्टर पर केंद्रित होता है।

ये भी पढ़ें - क्या Low NAV वाले म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद है? दूर कर लीजिए कंफ्यूजन

“शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।“

(डिस्क्लेमर: यहां निवेश की जानकारी दी गयी है, राय नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
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