कार्बेट में रोमांच का डबल डोज, बाघों के साथ ही लेपर्ड की चाल भी देख सकेंगे पर्यटक। प्रतीकात्मक
जागरण संवाददाता, रामनगर। पर्यटकों के लिए कार्बेट पार्क में डे सफारी के बाद अब लेपर्ड सफारी शुरू करने की योजना है। पर्यटकों को अब आसानी से लेपर्ड को नजदीक से निहारने का मौका मिलेगा। इसे धरातल पर उतारने के कवायद शुरू हो गई है।
लेपर्ड सफारी का तात्पर्य यह है कि कई हेक्टेयर तक वन क्षेत्र को प्राकृतिक रूप में चारों ओर से फेंसिंग करके बंद किया जाएगा। इसके बाद लेपर्ड उस वन क्षेत्र में छोड़े जाएंगे। पर्यटकों को विभागीय पंजीकृत बंद वाहन के भीतर बैठाकर उस क्षेत्र में सफारी कराई जाएगी। इससे लेपर्ड को चिड़ियाघर में पिंजड़े में देखने के बजाए उन्हें, उनके प्राकृतिक परिवेश जैसे घने जंगल, नदियों व मैदानों के बीच स्वतंत्र रूप से घूमते हुए देखने का पर्यटकों को रोमांचक अनुभव मिलेगा।
यह लेपर्ड सफारी कार्बेट टाइगर रिजर्व में कहां बनेगी, कितने वन क्षेत्र में बनेगी, क्या उसका डिजाइन होगा, कितनी लागत आएगी, कितने समय में पूरा होगा, कितने लेपर्ड रखने की क्षमता होगी आदि तमाम बिंदुओं पर कार्बेट निदेशक साकेत बडोला प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। वर्तमान में लेपर्ड सफारी राजस्थान, बेंगलुरु, महाराष्ट, मध्यप्रदेश में कराई जाती है।
लेपर्ड सफारी से एक साथ होंगे तीन फायदे
दरअसल यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इससे तीन फायदे देखने को मिलेंगे। एक तो रामनगर क्षेत्र में अधिकांश लेपर्ड जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र में डेरा जमाए हुए हैं। ऐसे में लोगों के लिए खतरा बने लेपर्ड को पकड़कर इस लेपर्ड सफारी में रखा जा सकता है। जिससे मानव वन्य जीव संघर्ष की रोकथाम होगी।
इसके अलावा लेपर्ड सफारी पहले से चली आ रही जिप्सी सफारी से अलग होगी। यानी लेपर्ड सफारी करने का अलग शुल्क पर्यटक को देना होगा। इससे सरकार को अच्छा राजस्व मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों के वाहन पंजीकृत करने के बाद लेपर्ड सफारी कराई जाएगी। स्थानीय लोगों का भी रोजगार सृजन होगा।
टाइगर सफारी अधर में, लेपर्ड सफारी को वन मंत्री गंभीर
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला ने कहा कि कालागढ़ पाखरो में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के अनुरुप टाइगर सफारी का काम शुरू हो गया था। लेकिन वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। यह योजना अधर में है। क्योंकि इसमें अभी जांच चल रही है। लेपर्ड सफारी की योजना प्रस्तावित है। प्रस्ताव में काफी कुछ चीजें शामिल होंगी। राज्य के वन मंत्री भी इस योजना को लेकर गंभीर है। प्रस्ताव बना रहे हैं। भारत सरकार से अनुमति लेकर इस योजना को धरातल पर उतारने की कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से भी उसमें अनुमति मिलनी जरूरी है। - डा. साकेत बडोला, निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर
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