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क्या दुर्लभ खनिज बचाने में नाकाम है देश का मौजूदा सिस्टम? E-Waste पॉलिसी पर टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट में खुलासा

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टाॅक्सिक्स लिंक की एक नई रिपोर्ट चेतावनी दे रही है। फोटो: आर्काइव



संजीव गुप्ता, जागरण। टाॅक्सिक्स लिंक की एक नई रिपोर्ट ने ई-कचरा प्रबंधन ढांचे की गंभीर कमियों को उजागर किया है। \“लाॅन्ग रोड टू सर्कुलैरिटी\“ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि भारत का वर्तमान विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व (ईपीआर) माॅडल उन महत्वपूर्ण खनिजों को बचाने में विफल हो रहा है, जो देश के हरित भविष्य और \“ग्रीन ट्रांजिशन\“ के लिए अनिवार्य हैं।
महत्वपूर्ण खनिजों का नुकसान

वर्तमान नियमों के तहत, ईपीआर फ्रेमवर्क केवल चार धातुओं—सोना, तांबा, लोहा और एल्युमीनियम—की रिकवरी को अनिवार्य बनाता है। रिपोर्ट के अनुसार, नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और लिथियम जैसी दुर्लभ और कीमती धातुएं, जो संसाधन सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं, फिलहाल इस सिस्टम से बाहर हैं और नष्ट हो रही हैं।
व्यवस्था में बड़ी खामियां

अध्ययन में ई-कचरा नियमों के क्रियान्वयन में कई परिचालन बाधाओं की पहचान की गई है:-

  • डेटा की कमी: ईपीआर पोर्टल पर बाजार के सभी खिलाड़ियों का डेटा उपलब्ध नहीं है। छोटे पैमाने के निर्माता, ऑनलाइन विक्रेता और ग्रे-मार्केट आयातक इस सिस्टम से बाहर हैं।
  • पारदर्शिता का अभाव: वित्तीय वर्ष 2023–24 और 2024–25 के लिए दंड और पर्यावरणीय मुआवजे से संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। विस्तृत डेटा केवल ऑपरेटरों तक सीमित है।
  • संग्रहण केंद्रों की समस्या: नियमों में किसी विशेष हितधारक को संग्रह केंद्र स्थापित करने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए अपना कचरा सही जगह जमा करना कठिन हो जाता है।
  • प्रोत्साहन की कमी: \“ग्रीन\“ प्रोडक्ट डिजाइन अपनाने वाले निर्माताओं या उच्च तकनीक वाली रीसाइक्लिंग सुविधाओं के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन मौजूद नहीं है।

टॉक्सिक्स लिंक ने कीं ये सिफारिशें

  • डेटा को सार्वजनिक कर प्रणाली की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाई जाए।
  • ई-कचरे के प्रवाह को सुव्यवस्थित करने के लिए \“रिवर्स सप्लाई चेन\“ और कलेक्शन मैकेनिज्म को मजबूत किया जाए।
  • अनौपचारिक क्षेत्र (कबाड़ी और छोटे रीसाइकिलर्स) को औपचारिक ई-कचरा प्रबंधन इकोसिस्टम में शामिल किया जाए।
  • उपभोक्ताओं के बीच ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग के फायदों के प्रति जागरूकता फैलाई जाए।
  • भारत को कचरा प्रबंधन से आगे बढ़कर एक \“सर्कुलर इकोनामी\“ की ओर बढ़ने के लिए इन नीतिगत बदलावों की तत्काल आवश्यकता है।


ईपीआर नियम अकेले वांछित परिणाम नहीं दे सकता। इसके लिए एक मजबूत कचरा संग्रह प्रणाली, अनौपचारिक क्षेत्र का एकीकरण और उच्च तकनीक वाली रीसाइक्लिंग सुविधाओं का होना अनिवार्य है।

-सतीश सिन्हा, एसोसिएट डायरेक्टर, टाॅक्सिक्स लिंक


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